‘अगर ऐसा हुआ तो नहीं करेंगे बर्दाश्त’, पाकिस्तान का CDF बनते ही आसिम मुनीर ने कसी शहबाज शरीफ की नकेल!


पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में जब आसिम मुनीर को सीडीएफ बनाए जाने के लिए संविधान संशोधन किया गया तो ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि अब देश में सेना की मनमर्जी खुलकर चलेगी. मुनीर के सीडीएफ बनने के बाद ये अटकलें सच होती दिखाई दे रही हैं. सीडीएफ पद संभाले आसिम मुनीर को अभी कुछ ही दिन हुए हैं और पाकिस्तान आर्मी ने शहबाज शरीफ सरकार को चेतावनी भी दे दी है.

पाकिस्तानी सेना के टॉप अधिकारियों ने बुधवार (25 दिसंबर 2025) को चेताया कि वे  राष्ट्रीय एकता, सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करने वाले किसी भी राजनीतिक हितों को बर्दाश्त नहीं करेंगे. रावलपिंडी में जनरल मुख्यालय (जीएचक्यू) में सेनाध्यक्ष और रक्षा बलों के प्रमुख सीडीएफ असीम मुनीर की अध्यक्षता में 273वें कोर कमांडरों के सम्मेलन के दौरान यह चेतावनी दी गई.

पाकिस्तानी नेताओं को सेना ने दी चेतावनी

सेना ने एक बयान में कहा कि बैठक में मौजूदा आंतरिक और बाहरी सुरक्षा माहौल की व्यापक समीक्षा की गई, जिसमें उभरते खतरों और ऑपरेशनल तैयारियों पर विशेष जोर दिया गया. बयान में कहा गया, ‘प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि राष्ट्रीय एकता, सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करने वाले किसी भी राजनीतिक या अन्य दुर्भावनापूर्ण हितों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और न ही किसी को सशस्त्र बलों और पाकिस्तान के लोगों के बीच विभाजन पैदा करने की अनुमति दी जाएगी.

पूर्व पीएम इमरान खान को लेकर सेना का बयान

इस महीने की शुरुआत में, सेना की मीडिया इकाई, इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने जेल में बंद पूर्व पीएम इमरान खान पर मीडिया के माध्यम से सशस्त्र बलों के खिलाफ एक सुनियोजित हमले की साजिश रचने का आरोप लगाया था. उन्होंने इमरान खान को मानसिक रूप से बीमार’ व्यक्ति बताते हुए चेतावनी दी थी कि इस तरह की हरकतें अब बर्दाश्त नहीं की जाएंगी.

मुनीर के हाथों में परमाणु हथियारों की कमान

पाकिस्तानी संविधान में 27वें अमेंडमेंट के जरिए यह पद बनाया गया है. इसके तहत अब आसिम मुनीर अगले पांच साल के लिए तीनों सेनाओं यानी आर्मी, एयर फोर्स और नेवी के हेड हैं. पाकिस्तान में बीते कुछ समय से लोगों की ओर से चुनी सरकार भले ही सत्ता पर काबिज हो, लेकिन यहां की राजनीति और आर्थिक क्षेत्रों पर सेना का प्रभाव अभी भी गहरा है.

मुनीर को तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ-साथ न्यूक्लियर वेपन सिस्टम का प्रभारी बना दिया गया है. तीनों सेनाओं का ओवरऑल कंट्रोल भी राष्ट्रपति और मंत्रिमंडल से हटाकर सीडीएफ को सौंप दिया गया है.



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