पश्चिमी एशिया में छिड़ी जंग के चलते दुनिया में ऊर्जा संकट खड़ा हुआ है. खाड़ी देशों से होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल-गैस और ईंधन के टैंकर आने में परेशानी हो रही है. ईरान ने इनमें से ज्यादातर की आवाजाही को रोक दिया है, जिससे कई देश प्रभावित हुए हैं. इसी बीच अमेरिका के करीबी देश को ईरान ने बड़ी राहत देते हुए होर्मुज स्ट्रेट से जहाज गुजरने की परमिशन देने के संकेत दिए हैं.
क्या बोले ईरान के विदेश मंत्री अराघची?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने टेलीग्राम अकाउंट पर शेयर किए एक इंटरव्यू के दौरान कहा, हम उनसे (जापान) सुरक्षित मार्ग खोजने के लिए बातचीत कर रहे हैं. हम उनको सेफ रूट देने के लिए तैयार हैं. उनको बस हमसे संपर्क करना होगा और रूट के बारे में चर्चा करनी होगी. अराघची का यह बयान मंगलवार को जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी के साथ हुई बातचीत के बाद आया है. जिसमें जापान ने खाड़ी में फंसे जापानी जहाजों को लेकर चिंता जाहिर की थी.
जापान के लिए क्यों अहम होर्मुज स्ट्रेट?
अगर ईरान की ओर से जापान को होर्मुज स्ट्रेट से जहाज गुजरने की इजाजत मिल जाती है तो यह उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जिनके जहाजों को हाल के समय में ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की परमिशन दी गई है. अभी इसमें मुख्य रूप से चीन, भारत और पाकिस्तान शामिल हैं.
कच्चे तेल को लेकर मिडिल ईस्ट पर निर्भर जापान
बता दें कि जापान अपने कच्चे तेल का करीब 90 फीसदी आयात मिडिल ईस्ट से ही करता है. यह होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते पर ही ज्यादा निर्भर करता है. 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग की वजह से यह रूट प्रभावित हुआ है. जिसकी वजह से तेल और गैस संकट पैदा हो गया है, जिससे भारत समेत कई देश प्रभावित हुए हैं. कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल देखने को मिला है.
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने जंग की शुरुआत में ही सीधी चेतावनी दी थी कि उसके जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों को आग के हवाले कर दिया जाएगा. इसके बाद से समुद्री यातायात लगभग ठप्प हो गया था. हालांकि, तेहरान की ओर से बीते सप्ताह बयान जारी कर कहा था कि होर्मुज स्ट्रेट केवल ईरान के दुश्मन देशों के लिए ही बंद है.