Donald Trump: ईरान में जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया को यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि हालात उनके नियंत्रण में हैं, लेकिन असलियत यह है कि अब उनकी अपनी सरकार के अंदर ही हलचल तेज हो गई है. जिस ‘रिजीम चेंज’ की बात ट्रंप ईरान को लेकर कर रहे थे, वही तरह का राजनीतिक दबाव अब उनके ऊपर अमेरिका के अंदर बनता दिख रहा है.
हाल ही में अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी को हटाए जाने के बाद व्हाइट हाउस में बड़े स्तर पर फेरबदल की चर्चा शुरू हो गई है. रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रंप अपनी कैबिनेट में बदलाव करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. वजह यह है कि ईरान के साथ चल रही जंग अब उनके लिए राजनीतिक और लोकप्रियता के लिहाज से भारी पड़ रही है.
मीडिया पर लगाए झूठ के आरोप
यह जंग करीब पांच हफ्ते से चल रही है और इसका असर सीधे अमेरिकी जनता पर दिख रहा है. पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ गए हैं, महंगाई को लेकर लोगों की चिंता बढ़ी है और ट्रंप की लोकप्रियता लगातार गिर रही है. हालिया सर्वे के मुताबिक उनकी अप्रूवल रेटिंग सिर्फ 36% तक रह गई है, जो उनके कार्यकाल में सबसे कम है.
राष्ट्र के नाम संबोधन बेअसर
व्हाइट हाउस के अंदर माना जा रहा है कि हालात उतने आसान नहीं हैं जितना बाहर दिखाया जा रहा है. ट्रंप ने हाल ही में राष्ट्र के नाम संबोधन दिया, जिससे उम्मीद थी कि जनता का भरोसा बढ़ेगा, लेकिन उल्टा इसका असर फीका रहा. रॉयटर्स ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि “यह भाषण वह काम नहीं कर पाया, जिसके लिए दिया गया था.”
ट्रंप की टीम पर दबाव
अब ट्रंप के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि क्या वह अपनी टीम में बदलाव करके हालात को संभाल सकते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ बड़े नामों पर खतरा मंडरा रहा है. इनमें नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड और कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक शामिल हैं. बताया जा रहा है कि ट्रंप पिछले समय से गबार्ड के काम से खुश नहीं हैं और उनके विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं. वहीं लुटनिक भी विवादों में हैं, खासकर उनके पुराने संबंधों को लेकर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, व्हाइट हाउस की तरफ से कहा गया है कि राष्ट्रपति को अपनी टीम पर भरोसा है.
बदलाव से बचने की रणनीति
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप खुद बड़े कैबिनेट बदलाव से बचना चाहते हैं. उनके पहले कार्यकाल में लगातार स्टाफ बदलने की वजह से आलोचना हुई थी. इसलिए इस बार वह “छोटे लेकिन असरदार बदलाव” करने की रणनीति पर काम कर सकते हैं, ताकि बड़ा झटका न लगे और यह संदेश जाए कि सरकार सक्रिय है.
जनता का विरोध और आर्थिक दबाव
समस्या सिर्फ सरकार के अंदर की नहीं है. अमेरिका में लोग भी ईरान जंग को लेकर चिंतित हैं. करीब 60% लोग इस जंग के खिलाफ हैं. उन्हें डर है कि यह लड़ाई लंबी खिंच सकती है और इसका आर्थिक बोझ आम जनता को उठाना पड़ेगा. ट्रंप के समर्थकों में भी बेचैनी है. महंगाई और बढ़ती कीमतें उनके समर्थन को प्रभावित कर रही हैं. एक अधिकारी ने कहा, “लोग विचारधारा सहन कर सकते हैं, लेकिन पेट्रोल के दाम तुरंत असर दिखाते हैं.”
मीडिया कवरेज से नाराज ट्रंप
इस बीच ट्रंप मीडिया कवरेज से भी नाराज हैं. उनका मानना है कि ईरान जंग को लेकर मीडिया उन्हें गलत तरीके से पेश कर रहा है. उन्होंने टीम से कहा है कि उन्हें ज्यादा सकारात्मक खबरें चाहिए. हालांकि, उन्होंने अपनी रणनीति या बयानबाजी बदलने का कोई संकेत नहीं दिया है.
भविष्य के संकेत: टारगेटेड बदलाव
ट्रंप अपनी छवि मजबूत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर हालात उनके खिलाफ जा रहे हैं. अब उनके पास दो विकल्प हैं: या तो टीम में बदलाव करके नई शुरुआत करें, या उसी टीम के साथ हालात संभालने की कोशिश करें. संकेत मिल रहे हैं कि बड़े पैमाने पर नहीं, लेकिन “टारगेटेड बदलाव” जरूर हो सकते हैं. कुछ खास चेहरों को हटाकर संदेश दिया जाएगा कि सरकार एक्शन में है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “बॉन्डी आखिरी नहीं हैं.” यह बयान साफ करता है कि आने वाले दिनों में व्हाइट हाउस में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं.