आत्मघाती हमले से दहल उठा पाकिस्तान, BLF ने सैन्य ठिकाने को बनाया निशाना, जानें क्यों खरबों के प्रोजेक्ट को लग सकता है झटका



पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के नोकुंदी इलाके में फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) के मुख्यालय के पास फिदायीन हमले हुए हैं. यह अटैक रिको डिक (Reko Diq) और सैंडक खनन प्रोजेक्ट से जुड़े विदेशी विशेषज्ञों, इंजीनियरों और स्टाफ के काम करने और रुकने के लिए बनाए गए कंपाउंड में हुआ है. इसे बलूच विद्रोही गुट ने रविवार (30 नवंबर) रात करीब 9 बजे अंजाम दिया. जानकारी के मुताबिक FC मुख्यालय के पास बने इस संवेदनशील कंपाउंड पर पहले बलूच विद्रोही गुट ने 5 बड़े धमाके किए और फिर सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी.

फिदायीन हमले की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने ले ली है और BLF के प्रवक्ता मेजर ग्वाहरम बलूच ने बयान जारी कर बताया कि यह हमला BLF की सादो ऑपरेशनल बटालियन (SOB) यूनिट ने अंजाम दिया था. अटैक में उस संवेदनशील कंपाउंड को निशाना बनाया गया है, जहां खनन प्रोजेक्ट से जुड़े विदेशी विशेषज्ञों, इंजीनियरों और स्टाफ के काम करने और रुकने-ठहरने की व्यवस्था पाकिस्तानी सरकार ने की है.

बलूच विद्रोही गुट और पाकिस्तानी सेना के बीच झड़प में अब तक मौत का आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है, लेकिन पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक हमला बलूचिस्तान के जिस नोकुंदी इलाके में हुआ है, व चगाई जिले में आता है और चगाई जिले के सभी अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है. हमले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह वही इलाका है जिसे पाकिस्तान सरकार दुनिया भर में अपनी “सबसे सुरक्षित” विदेशी निवेश परियोजना के रूप में पेश कर रही थी.

रिको डिक और सैंडक खनन प्रोजेक्ट का पाक ने पूरी दुनिया में पीटा ढिंढोरा

असल में पाकिस्तान की सरकार पूरी दुनिया को रिको डिक (Reko Diq) और सैंडक (Saindak) खनन प्रोजेक्ट में निवेश करने का निमंत्रण दे रही थी और जून में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकत के दौरान पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अमेरिका को रिको डिक खान में निवेश के लिए औपचारिक निमंत्रण दिया था. साथ ही पाकिस्तान पूरी दुनिया से दावा कर रहा था कि पश्चिमी देश रिको डिक खदान में निवेश करें, क्योंकि ये दुनिया की सबसे बड़ी सोनातांबा खदानों में से एक है, जिसे अब तक इसे ठीक से नहीं खोदा गया और इसके भीतर खरबों डॉलर मूल्य का सोना और तांबा दबा है.

साथ ही कुछ दिनों पहले ही पाकिस्तान ने रिको डिक खनन प्रोजेक्ट के लिए अमेरिका की आयात-निर्यात बैंक (EXIM) ने करीब 35 हजर करोड़ पाकिस्तानी रुपये का कर्ज भी दिया था, लेकिन इसी अब इसी परियोजना से जुड़े विदेशी इंजीनियरों और अन्य स्टाफ के लिए बने कंपाउंड पर फिदायीन हमला परियोजना की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.

अपने ही जाल में फंसा पाकिस्तान

बता दें कि पूरी दुनिया में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने वाला पाकिस्तान इस वक्त अपने पाले हुए आतंकियों की वजह से बड़े संकट से जूझ रहा है. इससे पहले 24 नवंबर को पेशावर स्थित FC हेडक्वार्टर पर ठीक इसी तरह का फिदायीन हमला हुआ था, जिसकी जिम्मेदारी तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान (TTP) के प्रॉक्सी ग्रुप जमात-उल-अहरार ने ली थी. साथ ही पिछले 10 दिनों में पाकिस्तान की सेना ने जिन 30 आतंकियों को मारा है, उसमें से 2 आतंकी बहावलपुर का अबू दुजाना उर्फ अली हमदान और पीओके का मोहम्मद हारिस दोनों को पाकिस्तानी सेना और ISI के समर्थित आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद ने भारत में आतंकवाद के लिए ट्रेन किया था, लेकिन दोनों ने 2 साल पहले TTP जॉइन कर ली थी और उल्टा पाकिस्तान की फौज जिसने उन्हें ट्रेन किया था, उस पर ही हमला करने लगे थे. ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा की पाकिस्तान जिस आतंकवाद को दुनिया में एक्सपोर्ट करने के लिए 30 साल से तैयार कर रहा है और उसके लिए आज एक बड़ा संकट बन कर सामने आ चुके है.



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