भारत-अमेरिका ट्रेड डील होने के बाद भारतीय आयात पर टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है. इस डील को लेकर तमाम अमेरिकी नेता और अधिकारियों के बयान सामने आए हैं, जिनमें वो भारत के रूसी तेल न खरीदने से लेकर अमेरिका में अरबों के निवेश तक के तमाम दावे कर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर इन सब से इतर प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जेफरी का बयान आया है.
जेफरी ने हाल ही में हुए अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की कड़ी आलोचना की. उन्होंने इसे महीनों से चली आ रही असफल दबाव रणनीति के बाद वाशिंगटन की स्पष्ट पीछे हटने की रणनीति बताया है. उन्होंने कहा कि इस कदम से अमेरिकी शक्ति का प्रदर्शन नहीं हुआ, बल्कि आत्मनिर्भर भारत से निपटने में अमेरिका की कमजोरी उजागर हुई है.
‘भारत ने अमेरिकी प्रभाव को काफी हद तक कम किया’
भारत की ओर से रियायतें देने के अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए जेफरी ने तर्क दिया कि नई दिल्ली की डायवर्स ग्लोबल बिजनेस पार्टनरशिप (विविध वैश्विक व्यापार साझेदारियों) ने अमेरिकी प्रभाव को काफी हद तक कम कर दिया है. उन्होंने इस बातचीत को लेकर शक्ति संतुलन को नया रूप देने का क्रेडिट भारत की पारंपरिक सहयोगियों से परे रणनीतिक पहुंच को दिया है.
‘भारत अपने हितों की रक्षा करने में सक्षम’
जेफरी के अनुसार व्यापार में हुए बदलाव से भारत आर्थिक और कूटनीतिक रूप से अधिक मजबूत होकर उभरा है, जिससे एक स्वतंत्र वैश्विक शक्ति के रूप में उसकी स्थिति और भी मजबूत हुई है. उन्होंने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए एकतरफा दबाव का विरोध करने में सक्षम है.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को फादर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है, इससे चंद दिनों पहले 27 जनवरी को भारत और यूरोपियन यूनियन (ईयू) के बीच व्यापार समझौता हुआ. इस डील को मदर ऑफ ऑल डील्स कहा गया. अमेरिका संग डील को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने सबसे पहले ऐलान किया था और भारत ने 18 फीसदी टैरिफ कम होने की जानकारी दी है. हालांकि इस डील को लेकर अभी कई चीजों में स्थिति स्पष्ट नहीं है.
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