देश में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन अब नेपाल से आगे बढ़कर ब्रिटेन तक पहुंच गए हैं. शनिवार (13 सितंबर) को लंदन की सड़कों पर ब्रिटेन के इतिहास का सबसे बड़ा विरोध मार्च आयोजित हुआ, जिसमें अनुमानित 1 लाख से अधिक लोग शामिल हुए. यह मार्च टॉमी रॉबिन्सन के नेतृत्व में हुआ, जिनके इशारे पर इतने बड़े पैमाने पर लोग अपनी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे.
कौन हैं टॉमी रॉबिन्सन?
टॉमी रॉबिन्सन का असली नाम स्टीफन याक्सली-लेनन है. वे 41 साल के हैं और उनका क्रिमिनल रिकॉर्ड काफी लंबा है. उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा है. रॉबिन्सन ने 2009 में इंग्लिश डिफेंस लीग की स्थापना की थी, जो बाद में अक्सर हिंसक झड़पों और फुटबॉल हूलिगनिज़्म से जुड़ा. 2013 में उन्होंने संगठन का नेतृत्व छोड़ दिया, लेकिन वे एक्टिव कार्यकर्ता और ऑनलाइन प्रचारक बने रहे.
टॉमी रॉबिन्सन के खिलाफ कई आपराधिक मामले
उनके आपराधिक रिकॉर्ड में हमला, बंधक बनाने, धोखाधड़ी और कोर्ट की अवमानना जैसे मामले शामिल हैं. 2018 में उन्होंने ट्रायल के बाहर लाइव स्ट्रीमिंग करने के आरोप में जेल का सामना किया, जबकि 2024 में हाईकोर्ट आदेश की अवहेलना पर उन्हें 18 महीने की सजा मिली. 2021 में उन्होंने दिवालिया होने की घोषणा की और बताया कि डोनेशन में मिली रकम का कुछ हिस्सा जुए में गंवा दिया. इसके बावजूद वह ब्रिटेन में एक प्रभावशाली व्यक्तित्व बने हुए हैं.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के खिलाफ लगे नारे
लंदन में हुए इस विरोध मार्च में प्रदर्शनकारियों ने यूनियन जैक, सेंट एंड जॉर्ज क्रॉस झंडे और कई अमेरिकी और इजरायली झंडे लहराए. रैली में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के खिलाफ नारे लगाए गए और उनके खिलाफ “घर भेजो” जैसी तख्तियां दिखाई गईं. रॉबिन्सन ने अपने पोस्ट में कहा कि यह मार्च अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अपने अधिकारों के लिए एकजुट होने का प्रतीक है.
टॉमी रॉबिन्सन की ब्रिटेन में लोकप्रियता बहुत अधिक
टॉमी रॉबिन्सन खुद को सरकार की कमियों को उजागर करने वाला पत्रकार मानते हैं और ब्रिटेन में उनकी लोकप्रियता बहुत अधिक है. इस मार्च ने साफ कर दिया कि सरकार के खिलाफ असंतोष अब बड़े पैमाने पर जनता में फैल रहा है.
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