आवारा कुत्तों पर राज्यों ने नहीं दाखिल किया जवाब, सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का दिया आदेश



आवारा कुत्तों के मामले में राज्यों की तरफ से हलफनामा दाखिल न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है. कोर्ट ने 3 नवंबर को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने को कहा है. कोर्ट ने कहा है कि पश्चिम बंगाल और तेलंगाना ने हलफनामा दाखिल किया है इसलिए, उनके मुख्य सचिवों को कोर्ट में उपस्थित नहीं होना होगा.

22 अगस्त को जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने सुनवाई का दायरा देशव्यापी करते हुए राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों को नोटिस जारी किया था. सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग हाई कोर्ट में लंबित आवारा कुत्तों से जुड़े मुकदमों को भी अपने पास ट्रांसफर कर लिया था. जजों ने कहा था कि वह इस विषय में राष्ट्रीय नीति बनाने पर चर्चा करेंगे.

कोर्ट के आदेश के मुताबिक राज्यों को अपने यहां एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स, 2023 (एबीसी रूल्स) के पालन के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देनी थी. एबीसी रूल्स में इस बात की व्यवस्था है कि आवारा कुत्तों को पकड़ कर उनकी नसबंदी और टीकाकरण (वैक्सिनेशन) किया जाए. इसके बाद उन्हें वापस वहीं छोड़ दिया जाए जहां से उन्हें पकड़ा गया था.

इससे पहले 11 अगस्त को जस्टिस जे बी पारडीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कुत्तों के काटने की घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में बंद करने का आदेश दिया था. इसे नियम विरुद्ध, अव्यवहारिक और क्रूर बताते हुए पशु प्रेमियों ने चीफ जस्टिस के सामने मामला रखा था. इसके बाद मामला 3 जजों की बेंच को भेजा गया.

3 जजों की बेंच ने पुराने आदेश को बदलते हुए दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को पकड़ कर स्टरलाइज और वैक्सिनेट करने और उन्हें उनके इलाके में वापस छोड़ने का आदेश दिया था. जजों ने इस बात पर हैरानी जताई कि उसके नोटिस के जवाब में 2 राज्यों को छोड़ कर किसी ने हलफनामा दाखिल नहीं किया. यहां तक कि दिल्ली सरकार का भी हलफनामा दाखिल नहीं हुआ है. सिर्फ एमसीडी (दिल्ली नगर निगम) ने इसे दाखिल किया है.

सोमवार, 27 अक्टूबर को हुई सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि पूरे देश में लगातार कुत्तों से जुड़ी घटनाएं हो रही हैं. दुनिया मे भारत की खराब छवि बनाई जा रही है. ऐसे में राज्य सरकारों का ढीला रवैया गलत है. कोर्ट ने राज्यों का जवाब दाखिल न होने पर एतराज जताते हुए कहा कि क्या राज्य के अधिकारी अखबार नहीं पढ़ते या सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करते? अगर उनके टेबल तक आदेश की कॉपी नहीं पहुंची, तब भी इस अहम मामले की जानकारी उन्हें ज़रूर मिल गई होगी.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *