आसिम मुनीर को ‘फेवरेट’ कहकर पछताए ट्रंप! एक बॉक्स की लालच में किया PAK पर भरोसा, जानें उसमें क्या था?


ट्रंप प्रशासन ने महत्वपूर्ण खनिजों के मामले में पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर पर भरोसा जताया है, लेकिन एक रिपोर्ट के मुताबिक यह दांव असफल होने वाला है. पाकिस्तान की अंदरूनी अस्थिरता, मिलिटेंट्स की बढ़ती ताकत और अमेरिकी हथियारों का उनके हाथों में पहुंचना इस साझेदारी को कमजोर कर रहा है.

मुनीर ने ट्रंप को क्रिटिकल मिनरल्स का लालच दिया

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने अमेरिका को बड़े खनिजों का प्रस्ताव दिया है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन चीन की पकड़ को कम करने के लिए कॉपर, लिथियम, कोबाल्ट, गोल्ड, रेयर अर्थ जैसे क्रिटिकल मिनरल्स पर फोकस कर रहा है. मुख्य प्रोजेक्ट रेको डिक (Reko Diq) बलूचिस्तान में है, जो:

  • दुनिया के सबसे बड़े अविकसित कॉपर-गोल्ड डिपॉजिट में से एक है.
  • बैरिक गोल्ड (कनाडाई कंपनी) की 50% हिस्सेदारी, पाकिस्तान सरकार की 25% और बलूचिस्तान सरकार की 25% हिस्सेदारी है.
  • दिसंबर 2025 में US एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ने 1.25 बिलियन डॉलर की फाइनेंसिंग मंजूर की.
  • पाकिस्तान का दावा है कि उसके पास कुल 8 ट्रिलियन डॉलर तक के खनिज रिजर्व हैं.
  • सितंबर 2025 में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और मुनीर ने व्हाइट हाउस में ट्रंप को रेयर अर्थ मिनरल्स का बॉक्स दिखाया. ट्रंप ने मुनीर को ‘माय फेवरेट फील्ड मार्शल’ कहा था.

ट्रंप के लिए क्रिटिकल मिनरल्स क्यों जरूरी है?

दुनिया में 90% से ज्यादा रेयर अर्थ प्रोसेसिंग चीन के पास है. आने वाले समय में EV, AI और इलेक्ट्रिफिकेशन की वजह से कॉपर की डिमांड 2050 तक दोगुनी हो सकती है. इस वजह से अमेरिका वैकल्पिक सप्लाई चेन चाहता है.

लेकिन क्यों यह दांव फेल हो सकता है?

खनिज ज्यादातर बलूचिस्तान और अफगान बॉर्डर इलाकों में हैं, जहां सुरक्षा स्थिति बिगड़ रही है. ट्रंप का दांव फेल होने की 5 बड़ी वजहें हैं:

1. बेहतर हथियारों से लैस मिलिटेंट्स: 2021 में अफगानिस्तान से अमेरिकी वापसी के बाद छूटे अमेरिकी हथियार (M-16, M-4, M249 मशीन गन, Remington स्नाइपर राइफल्स, नाइट विजन डिवाइस) अब TTP, BLA और ISKP जैसे ग्रुप्स के पास हैं. CNN ने पाकिस्तानी बॉर्डर इलाकों में 100 से ज्यादा ऐसे हथियार दिखाए, जिनकी सीरियल नंबर से पता चला कि ये अफगान फोर्सेस को दिए गए थे. अब हमलों में IED की बजाय लंबी रेंज की फायरिंग और नाइट अटैक हो रहे हैं. एक पाकिस्तानी सैनिक अल्लाह उद्दीन ने बताया कि घात में दोनों पैर गंवाने के बाद वह गुस्से में है, क्योंकि मिलिटेंट्स के हथियार ‘अलग और बेहतर’ थे.

2. बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा: बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने जनवरी 2026 में कोऑर्डिनेटेड अटैक किए, जिसमें 33 से ज्यादा मौतें हुईं. पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन रद्द-उल-फितना-1’ चलाया और 216 मिलिटेंट्स मारने का दावा किया, लेकिन 36 नागरिक और 22 सिक्योरिटी पर्सनल भी मारे गए. 2025 बलूचिस्तान का सबसे खतरनाक साल था. तब 254 से ज्यादा अटैक हुए थे, जिसमें 400 से ज्यादा मौतें हुईं थीं. मिलिटेंट्स अब ट्रेन हाईजैक, हाईवे ब्लॉक और इलाके कब्जा कर रहे हैं.

3. रेको डिक पर असर: बैरिक गोल्ड के CEO मार्क हिल ने फरवरी 2026 में कहा कि कंपनी प्रोजेक्ट की पूरी समीक्षा कर रही है. निवेशक डर रहे हैं कि प्रोजेक्ट 2028 में शुरू भी हो पाएगा या नहीं.

4. अफगानिस्तान का कनेक्शन: तालिबान ने हथियारों पर कब्जा किया है और पाकिस्तान उन्हें मिलिटेंट्स को शेल्टर देने का आरोप लगाता है. ट्रंप ने हथियार वापस मांगे, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली है.

5. मुनीर के हाथों में पावर जाने के बाद हमले बढ़े: 6 फरवरी 2026 को इस्लामाबाद के बाहरी इलाके तरलाई कलां में खदीजा तुल कुबरा शिया मस्जिद पर सुसाइड बॉम्बिंग हुई. इस हमले में 31 से 32 लोग मारे गए और 160 से 170 से ज्यादा घायल हुए. यह हमला जुमा की नमाज के दौरान हुआ, जहां बॉम्बर ने विस्फोटक वेस्ट पहनकर खुद को उड़ा लिया. इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने इसकी जिम्मेदारी ली. इससे पहले नवंबर 2025 में कोर्ट के बाहर 12 मौतें हुई थीं. इससे पाकिस्तान की राजधानी में भी सुरक्षा की कमजोरी साफ दिखी, जहां जनरल मुनीर और सरकार बड़े-बड़े दावे करते हैं.

तो इसके नतीजे क्या होंगे?

IMF से पाकिस्तान 24 बार मदद ले चुका है. इस वजह से खनिज आर्थिक रिकवरी की उम्मीद हैं. लेकिन बिना स्थानीय लोगों को फायदा पहुंचाए और राजनीतिक मदद के बिना, प्रोजेक्ट्स असुरक्षित रहेंगे. ट्रंप की चीन विरोधी स्ट्रैटेजी में पाकिस्तान एक ‘हेज’ था, लेकिन अब सिक्योरिटी रिस्क्स से यह कमजोर पड़ रहा है. पाकिस्तान और चीन CPEC और ‘ऑल-वेदर’ दोस्त बने हुए हैं, तो पाकिस्तान दो तरफा खेल रहा है. बिना डायलॉग, डेवलपमेंट और पावर-शेयरिंग के ये खनिज जमीन में दबे रह सकते हैं.



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