दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को कोर्ट के बड़ा झटका लगा है. गुरुवार (19 फरवरी) को कोर्ट ने उनको दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है. कोर्ट ने 3 दिसंबर 2024 को उन्हे मार्शल लॉ से जुड़े विद्रोह की अगुवाई करने का दोषी पाया गया था. यून सुक ने 443 दिन पहले मॉर्शल लॉ की घोषणा की थी, जिसके बाद अब उनको सजा सुनाई गई है. यून कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं.
द कोरिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अभियोजन पक्ष ने उनको फांसी देने की मांग की गई थी, लेकिन कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया. कोरिया के क्रिमिनल लॉ के मुताबिक विद्रोह करने वाले अपराधी को केवल तीन तरह की सजा का प्रावधान है, जिसमें फांसी, श्रम के साथ उम्रकैद या बगैर श्रम के उम्रकैद शामिल है. कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचा कि यह आदेश विद्रोह की कानूनी परिभाषा को पूरा करता है.
जस्टिस जी कुई-यून ने अपने आदेश में कहा कि साउथ कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति ने संसद पर अवैध कब्जे की कोशिश की. इसके लिए आर्मी और पुलिस को जुटाया गया और नेताओं को अरेस्ट करते हुए तानाशाही को लागू किया गया.
कोर्ट ने कहा, ‘अगर यह साबित हो जाता है कि देश की संवैधानिक व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश की गई थी तो मौजदूा राष्ट्रपति पर भी विद्रोह के आरोप लग सकते हैं. आदेशमें यह भी जोड़ा गया कि मार्शल लॉ की घोषणा से देश के सरकारी संस्थानों को भी नुकसान हुआ. यही नहीं आर्मी और पुलिस ने भी अपनी तटस्थता खो दी, जिसके चलते विदेश में भी दक्षिण कोरिया की छवि को नुकसान पहुंचा.’
यून के वकीलों ने दावा किया कि राष्ट्रपति की घोषणा राष्ट्रपति के अधिकार के प्रयोग के तहत की गई थी, जिसका मकसद लोगों को राष्ट्रीय संकट के लिए सावधान करना था. उन्होंने अपने फैसले को संवैधानिक व्यवस्था को खत्म करने को लेकर नहीं बल्कि एक चेतावनी और अपील के तौर पर उठाया था. पूर्व राष्ट्रपति के साथ पूर्व रक्षामंत्री योंग ह्यून को भी 30 साल की सजा सुनाई गई है.