अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग के 26वें दिन बातचीत की कोशिशें और मुश्किल हो गई हैं. ईरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के सामने अपनी मुख्य मांगें रख दी हैं. ये मांगें इतनी सख्त हैं कि कई विशेषज्ञों का कहना है कि इन पर सहमति बनना अभी बहुत दूर लग रहा है.
ईरान ने अमेरिका से ऐसा क्या मांग लिया?
ईरान की 4 प्रमुख मांगें हैं:
- भविष्य में कोई सैन्य हमला नहीं: ईरान ने कहा कि अमेरिका और इजरायल दोनों से लिखित गारंटी दी जाए कि आगे कभी भी ईरान पर सैन्य कार्रवाई नहीं होगी.
- युद्ध का पूरा नुकसान भरपाई: जंग में हुए जान-माल के नुकसान की पूरी क्षतिपूर्ति (war reparations) अमेरिका और उसके सहयोगियों से मांगी गई है.
- होर्मुज स्ट्रेट पर पूरा कंट्रोल: ईरान चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसका औपचारिक और पूरा कंट्रोल रहे. साथ ही अमेरिका और इजरायल के जहाजों को लेकर सख्त शर्तें लगाई जा सकती हैं.
- बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर कोई प्रतिबंध नहीं: ईरान ने साफ कहा कि उसके बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम पर कोई रोक या प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा.
ईरान की और अहम मांगें हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने ये भी कहा है:
- खाड़ी इलाके (Gulf) में अमेरिका के सभी सैन्य बेस बंद किए जाएं.
- इजरायल हिजबुल्लाह पर हमले तुरंत बंद करे.
- ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध (sanctions) पूरी तरह हटा दिए जाएं.
ईरान का रुख अब पहले से ज्यादा सख्त हो गया है. तेहरान ने मध्यस्थों को बताया कि ट्रंप ने पहले दो बार धोखा दिया था, इसलिए तीसरी बार कोई रिस्क नहीं लिया जाएगा. अमेरिका का और सैनिक भेजना भी ईरान की शंकाओं को बढ़ा रहा है.
ईरान ने ट्रंप के दावे को किया खारिज
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कल कहा था कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और बातचीत अच्छी चल रही है, लेकिन ईरान ने साफ इनकार किया है कि कोई सीधी बातचीत हो रही है. तेहरान कह रहा है कि सिर्फ मध्यस्थों (जैसे ओमान, कतर, पाकिस्तान) के जरिए संदेश आ रहे हैं.
ईरान जेडी वेंस को बातचीतकर्ता के तौर पर पसंद करता है, जबकि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ पहले हुई बैठक फेल हो चुकी है.
शांति वार्ता की चर्चा के बीच मौजूदा हालात कैसे हैं?
इस बीच हमले लगातार जारी हैं. हिजबुल्लाह ने हाइफा-नाहारिया पर 30 से ज्यादा रॉकेट दागे. ईरान ने इजरायल की एयरोस्पेस फैक्टरियों पर ड्रोन हमले किए. इजरायल ने शिराज एयरपोर्ट समेत ईरानी ठिकानों पर हमले जारी रखे. कुवैत एयरपोर्ट के फ्यूल टैंक में भी आग लगी.
हॉर्मुज में तनाव के कारण तेल की कीमतें 94-97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं. ईरान ने कहा है कि गैर-दुश्मन जहाजों को गुजरने देगा, लेकिन दुश्मन देशों के जहाजों को नहीं.
मिडिल ईस्ट वॉर और शांति वार्ता के बीच भारत का रोल क्या है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप से फोन पर बात की और हॉर्मुज स्ट्रेट को खुला-सुरक्षित रखने तथा इलाके में जल्द शांति की अपील की. भारत अपनी तेल सप्लाई और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सतर्क है. स्थिति अभी भी बहुत संवेदनशील है. ईरान की इन सख्त मांगों के बाद बातचीत की राह और पेचीदा हो गई है. अगर जल्द कोई समझौता नहीं हुआ तो ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट्स पर दोबारा हमले की चेतावनी दी है.
दुनिया भर के देश इस जंग के जल्द खत्म होने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन दोनों तरफ से रुख सख्त बना हुआ है.