ईरान के हमले से बौखलाए सऊदी ने लिया बड़ा एक्शन, मिलिट्री अटैची समेत दूतावास के 5 कर्मचारियों को निकाला


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मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब ने कड़ा कदम उठाते हुए ईरान के मिलिट्री अटैची और दूतावास के कुछ कर्मचारियों को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया है. सऊदी के विदेश मंत्रालय ने शनिवार (21 मार्च, 2026) को एक आधिकारिक बयान जारी किया, जिसमें ईरानी दूतावास के इन अधिकारियों को persona non grata यानी अवांछित व्यक्ति घोषित किया गया है.

मंत्रालय के मुताबिक, इस कार्रवाई में ईरानी दूतावास के सैन्य अताशे, सहायक सैन्य अताशे और मिशन स्टाफ के तीन सदस्य शामिल हैं. दरअसल, यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब इलाके में संघर्ष लगातार तेज हो रहा है और ईरान पर सऊदी अरब के क्षेत्र में बार-बार हमले करने के आरोप लगाए जा रहे हैं.

ईरान ने सऊदी समेत अन्य खाड़ी देशों को भी बनाया निशाना

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटनाक्रम अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के चल रहे युद्ध के बीच सामने आया है. इस संघर्ष के दौरान ईरान ने सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों को निशाना बनाया है, खासकर उन जगहों को जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं. इन हमलों का असर न सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित रहा, बल्कि रिहायशी इलाकों और एनर्जी फेसिलिटीज को भी भारी नुकसान पहुंचा है. और तो और इससे पूरे इलाके में अस्थिरता फैल गई है और वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ है.

सऊदी में रिहायशी इलाकों के साथ ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर भी हुए हमले

सऊदी अरब, जिसके पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का भंडार है, युद्ध शुरू होने के बाद से इस देश पर सैकड़ों की संख्या में मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए हैं. अधिकारियों ने कहा कि इन हमलों में से ज्यादातर को इंटरसेप्ट कर लिया गया. हालांकि, कई हमलों ने ऊर्जा ढांचे और महत्वपूर्ण जगहों को काफी प्रभावित किया है. यहां तक कि राजधानी रियाद भी इन हमलों से अछूता नहीं रहा है, जहां हाल ही में अमेरिकी दूतावास के पास ड्रोन हमले की घटना सामने आई.

सऊदी के विदेश मंत्री ने ईरान को दी धमकी

सऊदी अरब की तरफ से शनिवार (21 मार्च, 2026) को आधिकारिक बयान विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के हाल ही में दिए उस बयान के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान पर भरोसा अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है. इस दौरान उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सऊदी अरब को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का पूरा हक है और जरूरत पड़ने पर देश अपनी सैन्य क्षमता का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा.

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