ईरान ने पाकिस्तान की ओर से जारी 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को ठुकराया दिया है. विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि ईरान ने बिचौलियों के जरिए भेजे गए हालिया शांति प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. ईरान ने दोहराया है कि युद्धविराम पर कोई भी बातचीत उसके राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर की जाएगी.
न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान और अमेरिका दोनों को एक मसौदा प्रस्ताव मिला था, जिसे पाकिस्तान ने तैयार किया था. इसमें जंग को खत्म करने का रास्ता खोजने के लिए 45 दिनों का सीजफायर और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की बात कही गई थी. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि तेहरान ने मध्यस्थ के जरिए अपनी स्थिति और शर्तें पहले ही बता दी थी.
दवाब में कोई बात नहीं होगी: ईरान
उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी तरह के दबाव या धमकियों के आगे झुककर बातचीत नहीं करेगा. इस्माइल बगाई ने कहा, ‘डेडलाइन और युद्ध करने की धमकी बातचीत के साथ मेल नहीं खाता. तेहरान की कुछ शर्तें हैं जो उसके राष्ट्रीय हितों पर आधारित हैं और इसे किसी भी तरह के समझौते के संकेत के तौर पर नहीं समझा जाना चाहिए.’
बगाई ने कहा, ‘ईरान अपनी उन मांगों को साफ-साफ बताने में जरा भी नहीं हिचकिचाता जिन्हें वह जायज मानता है. ऐसा करने को किसी समझौते के संकेत के तौर पर नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की झलक के तौर पर देखा जाना चाहिए.’ तेहरान ने कहा कि वह अमेरिका के लिए अपना डिप्लोमैटिक जवाब तैयार कर लिया है और सही समय पर इसकी घोषणा करेगा.
डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को धमकी
ये सब ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले (5 अप्रैल 2026) को अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा कि मंगलवार (7 अप्रैल 2026) को ईरान में पावर प्लांट डे और ब्रिज डे होगा. ये साफ तौर पर ईरान के पावर प्लांट और पुलों पर हमले की धमकी है. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका-ईरान के बीच अभी बातचीत चल रही है और 6 अप्रैल को समझौता होने की अच्छी संभावना है.
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