मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार (19 मार्च 2026) को दावा किया कि ईरान की नेवी और एयरफोर्स खत्म हो चुकी है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैनिक कहीं भी तैनात नहीं होंगे. ट्रंप ने दो दिन पहले ही कहा था कि वह ईरान की जमीन पर अमेरिकी सेना उतारने से नहीं डरते.
जापान के पत्रकार ने ट्रंप से पूछा था सवाल कि ईरान पर हमले से पहले अमेरिका ने अपने मित्र-देशों को भरोसे में क्यों नहीं लिया? ट्रंप ने जापान की पीएम की मौजूदगी में हाजिर जवाब देते हुए कहा, ‘क्या दूसरे विश्वयुद्ध में जापान ने अमेरिका के पर्ल हार्बर पर हमले से पहले किसी को बताया था कि वे अटैक करने जा रहे हैं.’
ईरान दुनिया के लिए एक गंभीर खतरा: ट्रंप
ट्रंप ने दोहराया कि ईरान दुनिया के लिए एक गंभीर खतरा है और इस बात से हर देश उनसे सहमत हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं कहीं भी सेना नहीं भेज रहा हूँ. अगर भेज भी रहा होता तो मैं ये बात किसी को नहीं बताता. ईरान की नौसेना और वायुसेना पूरी तरह खत्म हो चुकी है. उनके एयर डिफेंस सिस्टम खत्म हो चुके हैं. हम जहां चाहें वहां उड़ान भर सकते हैं. कोई हम पर हमला नहीं कर रहा है.’
ट्रंप ने कहा, ‘हम जब चाहें तब खर्ग द्वीप पर कब्जा कर सकते हैं. मैं उसे बस एक छोटा द्वीप कहता हूं. वह पूरी तरह असुरक्षित है. हमने वहां कुछ पाइपों को छोड़कर सब कुछ तबाह कर दिया है.’ ट्रंप ने कहा, ‘हमारे पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है. हमारे पास बेहतरीन उपकरण हैं. हम सबसे बेहतरीन हथियार बनाते हैं. पिछली रात, एक खास जगह पर 114 रॉकेट दागे गए. उन सभी को हमारे उपकरणों ने मार गिराया.’
नेतन्याहू को लेकर क्या बोले ट्रंप?
जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पूछा गया कि क्या उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू से तेल और गैस क्षेत्रों पर हमले के बारे में बातचीत की थी? इस पर ट्रंप ने कहा, ‘हां नेतन्याहू से मेरी बात हुई थी. मैंने उनसे कहा था कि ऐसी जगहों को निशाना मत बनाइए.’
यूरोपीय देशों पर भड़के ट्रंप
ट्रंप का कहना है कि नाटो के उलट जापान ईरान जंग में सक्रिय भूमिका निभा रहा है. उन्होंने कहा कि ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर जापान से मिले समर्थन से मैं खुश हूं. ट्रंप ने इसकी तुलना यूरोपीय सहयोगियों से की, जिन्होंने इस जंग में खुलकर यूएस का साथ नहीं दिया है. उन्होंने कहा, ‘हमें हर मामले में जापान से जबरदस्त समर्थन और अच्छे संबंध मिले हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा में यूरोपीय देश हमारी मदद नहीं करना चाहते हैं, जबकि उन्हें इसकी ज्यादा जरूरत है. हालांकि अब उनका रुख नरम पड़ा है क्योंकि वे मेरा सख्त रवैया देख रहे हैं.’