ईरान में स्कूल पर हुए हमले को लेकर पेंटागन की रिपोर्ट सामने आई है. शुरुआती सैन्य जांच में संकेत मिले हैं कि 28 फरवरी को ईरान के मिनाब शहर में स्थित शजराह तैय्यबेह स्कूल पर हुआ मिसाइल हमला अमेरिकी सेना की गलती से हुआ था. जांच के मुताबिक अमेरिकी सेना ने पास के ईरानी नौसैनिक ठिकाने को निशाना बनाते समय पुराने और गलत टार्गेटिंग डेटा का इस्तेमाल किया, जिसके कारण टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल स्कूल की इमारत पर जा गिरी.
पेंटागन की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
रिपोर्ट के अनुसार यह इमारत पहले सैन्य परिसर का हिस्सा थी, लेकिन बाद में इसे स्कूल में बदल दिया गया था. इस हमले में कम से कम 175 लोगों की मौत हुई, जिनमें अधिकांश बच्चे बताए जा रहे हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि पुराना डेटा दोबारा वेरीफाई क्यों नहीं किया गया. इस घटना ने अमेरिका के सैन्य अभियान पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार बताया था, लेकिन अब व्हाइट हाउस ने कहा है कि सरकार जांच के अंतिम निष्कर्षों को स्वीकार करेगी.
क्या पुराने डेटा का हुआ था इस्तेमाल?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हाल के दशकों की सबसे भयानक सैन्य गलतियों में से एक हो सकती है. इस स्कूल की इमारत को 2013 और 2016 के बीच सैन्य अड्डे से घेर कर अलग कर दिया गया था. जब रक्षा खुफिया एजेंसी का डेटा पुराना हो जाता है तो खुफिया अधिकारियों को टारगेट को फिर से वेरीफाई करना होता है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जांच कर रहे अधिकारियों ने इस बात की पड़ताल की है कि क्या स्कूल को गलत तरीके से निशाना बनाने के लिए कोई एआई मॉडल, डेटा विश्लेषण कार्यक्रम या अन्य तकनीकी खुफिया जानकारी जुटाने के साधन जिम्मेदार थे.
इस हमले में अमेरिका का दोष नहीं: ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने खुद मिनाब शहर के एक स्कूल पर हमला किया. उन्होंने कहा कि ईरान को कहीं से टॉमहॉक मिसाइल मिल गई और उसने इससे अपने स्कूल पर हमला कर दिया. इसके बाद जब टॉमहॉक मिसाइल चलने का वीडियो सामने आया तो ट्रंप ने सफाई में कहा, ‘मुझे बताया गया कि इसकी जांच चल रही है. इसमें सिर्फ अमेरिका को ही दोष नहीं देना चाहिए.’