मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा हुआ है. इससे पूरी दुनिया के ऊर्जा आपूर्ति पर संकट छाया हुआ है, जिसमें बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे साउथ एशिया के देश भी शामिल हैं, जहां की सरकारों ने ईरान युद्ध से पड़ने वाले प्रभावों को लेकर कई बड़े फैसले किए हैं.
बांग्लादेश
- रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में आपूर्ति के दबाव को देखते हुए सरकार ने दफ्तरों के काम करने समय को घटा दिया है, अब इसे सामान्य रूप से सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक कर दिया गया है.
- देश में बिजली और ऊर्जा बचाने के लिए बाजारों और शॉपिंग सेंटरों को भी जल्दी बंद करने के आदेश दिए गए हैं. नए नियमों के तहत सरकार दफ्तर सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक चलेंगे, जबकि बाजार और शॉपिंग सेंटर्स शाम 6 बजे बंद हो जाएंगे.
- रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश सरकार गैर-जरूरी खर्चों में कटौती कर रही है और उद्योगों से अत्यधिक लाइटिंग जैसी बिजली की खपत कम करने का अनुरोध कर रही है.
- रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा मंत्रालय स्कूलों के समय में बदलाव और आंशिक ऑनलाइन क्लास कराने पर विचार कर रहा है, ताकि छात्रों के लाने-ले जाने में खर्च होने वाली ऊर्जा की खपत पर रोक लगाई जा सके. यह कदम मध्य पूर्व में युद्ध के कारण ईंधन के आयात की लागत और आपूर्ति में आ रही मुश्किलों की वजह से उठाया जा रहा है. सरकार वर्क-फ्रॉम-होम और साप्ताहिक छुट्टियों में बदलाव जैसे उपायों पर भी विचार कर रही है. शिक्षा मंत्रालय रविवार से स्कूलों के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगा, जिसमें टाइम टेबल में बदलाव और ऑनलाइन कक्षाओं में बदलाव जैसे ऑप्शन शामिल होंगे.
- ऊर्जा संकट गहराने के बीच बांग्लादेश ने रूस से डीजल आयात की अनुमति के लिए अमेरिका से अस्थायी प्रतिबंध छूट (Waiver) मांगी है. अधिकारियों के अनुसार, मध्य पूर्व में उथल-पुथल से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो रहे हैं और ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है. ढाका ने भारत को दी गई छूट की तरह ही अनुमति का मांग की है और लगभग 600,000 मीट्रिक टन रूसी डीजल आयात का प्रस्ताव रखा है.
पाकिस्तान
- अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध से बने तेल संकट के कारण पाकिस्तान ने व्यापक मितव्ययिता (Sweeping Austerity) उपायों का आदेश दिया है.
- रॉयटर्स के मुताबिक, पाकिस्तान तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी के बीच ऊर्जा खपत बचाने के लिए स्कूल बंद करने और अन्य कई उपाय अपनाने का फैसला किया है.
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक तेल कीमतों में आए उछाल के बीच पाकिस्तान ने भी अपने देश में फ्यूल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की है. पाकिस्तान ने गुरुवार (2 अप्रैल, 2026) को डीजल और पेट्रोल की उपभोक्ता कीमतों में तेज वृद्धि की, जो एक महीने से भी कम समय में दूसरी बार की गई बढ़ोत्तरी है. डीजल की कीमत 54.9% बढ़ाकर 520.35 रुपये प्रति लीटर कर दी गई, जबकि पेट्रोल की कीमत 42.7% बढ़ाकर 458.40 रुपये प्रति लीटर कर दी गई.
- फ्यूल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी पर तीखी प्रतिक्रिया के एक दिन बाद पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल की कीमत में 80 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की कटौती कर दी. गुरुवार (2 अप्रैल) को सरकार ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमतों में क्रमशः 43% और 55% की अभूतपूर्व वृद्धि की घोषणा की थी. इसके अगले दिन इस भारी बढ़ोतरी के खिलाफ तेज विरोध होने लगा. इसके बाद पीएम शहबाज शरीफ ने पेट्रोल पर 80 रुपये प्रति लीटर की कटौती की घोषणा की.
श्रीलंका
- रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ऊर्जा लागत बढ़ने के असर के चलते श्रीलंका ने देश में बिजली की कीमत (पावर टैरिफ) में वृद्धि की है.
- ईंधन की खपत को कंट्रोल करने के लिए श्रीलंका ने हर बुधवार को सरकारी छुट्टी घोषित की है. इसके साथ फ्यूल रैशनिंग लागू की है और इस महीने की शुरुआत में पेट्रोल पंप पर कीमतों में लगभग 35% की बढ़ोतरी की है.
- रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, द्वीपीय देश श्रीलंका ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए रूस, भारत और अमेरिका के साथ लगातार बातचीत कर रहा है. इसके अलावा, राज्य संचालित सीलोन पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष जनक राजकरूणा के मुताबिक, अप्रैल महीने के लिए रिफाइंड फ्यूल की खरीदने के लिए श्रीलंका 600 मिलियन डॉलर खर्च कर रहा है.
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