कर्नाटक सरकार ने जाति जनगणना की समय सीमा बढ़ाई, अब इस तारीख तक होगा सर्वे



कर्नाटक सरकार ने राज्य में सामाजिक और शैक्षिक सर्वेक्षण का समय सीमा में विस्तार किया है. राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार (19 अक्टूबर, 2025) को कहा कि सरकार ने सामाजिक और शैक्षिक सर्वेक्षण को पूरा करने की आखिरी तारीख को 31 अक्टूबर, 2025 तक बढ़ाने का फैसला किया है. इस सर्वेक्षण को व्यापक रूप से जाति जनगणना भी कहा जा रहा है.

उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण की शेष अवधि के दौरान शिक्षकों को गणना कार्य के लिए नहीं लगाया जाएगा. कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से किया जा रहा यह सर्वेक्षण 22 सितंबर, 2025 को शुरू हुआ था और इसे मूल रूप से 7 अक्टूबर, 2025 को समाप्त होना था. हालांकि, राज्य सरकार ने बाद में सर्वेक्षण की तारीख को 18 अक्टूबर तक बढ़ाने का फैसला किया था और शासकीय व सहायता प्राप्त विद्यालयों में दशहरा की छुट्टियों को भी 18 अक्टूबर तक बढ़ाने का फैसला किया था ताकि गणना करने वालों के रूप में तैनात शिक्षकों की मदद से सर्वेक्षण पूरा किया जा सके.

मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और अधिकारियों के साथ की बैठक

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने रविवार (19 अक्टूबर, 2025) को वरिष्ठ मंत्रियों, अधिकारियों और कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष मधुसूदन आर. नाइक के साथ सर्वेक्षण की प्रगति पर एक बैठक की अध्यक्षता की.

राज्य के कई हिस्सों में 90 प्रतिशत काम हो चुका पूरा- शिवकुमार

शिवकुमार ने कहा, ‘बेंगलुरू दक्षिण, बीदर, धारवाड़ को छोड़कर राज्य के अन्य सभी हिस्सों में सर्वेक्षण का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और यह अच्छी तरह से किया गया है. बेंगलुरु शहर में 67 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, जिसमें से 20 प्रतिशत ने जानकारी नहीं दी है. हमने सर्वेक्षण की तारीख को 31 अक्टूबर, 2025 तक बढ़ा दिया है. अब से हम गणना कार्य के लिए शिक्षकों को नहीं लगाएंगे.’

उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘दीपावली के त्योहार के मद्देनजर 20, 21 और 22 अक्टूबर को छुट्टी रहेगी. गणना कार्य में लगे अन्य सरकारी कर्मचारियों को सर्वेक्षण पूरा करने के लिए लगाया जाएगा. ऑनलाइन सर्वेक्षण के विकल्प उपलब्ध होंगे, जिनका उपयोग कोई भी कर सकता है. यह सर्वेक्षण 31 अक्टूबर तक चलेगा. मैं सभी समुदायों के लोगों से अनुरोध करता हूं कि वे इस अवसर से न चूकें और सर्वेक्षण में भाग लें और प्रश्नों के उत्तर दें.’ हालांकि, समय सीमा बढ़ाने से पहले इस सर्वेक्षण पर 420 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था.

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