किस बात पर इतना उछल रहा पाकिस्तान, 300 फीसदी घाटे में सरकारी कंपनियां, कंगाल हो गई जनता


पाकिस्तान की सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियां देश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ बनती जा रही हैं. एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इन कंपनियों का शुद्ध घाटा 300 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जबकि करदाताओं के पैसे से दी जाने वाली सरकारी मदद बढ़कर 2.1 ट्रिलियन रुपये (स्थानीय मुद्रा) तक पहुंच चुकी है.

पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के एक संपादकीय में हालात को बेहद चिंताजनक बताया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में सरकारी कंपनियों का कुल राजस्व 1.4 ट्रिलियन रुपये घटकर 12.4 ट्रिलियन रुपये रह गया. वहीं, इन कंपनियों का कुल शुद्ध घाटा बढ़कर 122.9 अरब रुपये हो गया, जो पिछले साल 30.6 अरब रुपये था.

वित्तीय बदहाली का आईना बनी सरकारी कंपनियां
संपादकीय में कहा गया है कि अगर पाकिस्तान की वित्तीय बदहाली को किसी एक पैमाने से समझना हो, तो वह सरकारी कंपनियों का प्रदर्शन है. रिपोर्ट ने इसे भयानक संरचनात्मक विफलता करार दिया है, जो लगातार सार्वजनिक संसाधनों को निगल रही है और देश की आर्थिक स्थिरता को कमजोर कर रही है.

नेशनल हाईवे अथॉरिटी और बिजली कंपनियां सबसे बड़े घाटे में
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (नेशनल हाईवे अथॉरिटी) और बिजली वितरण कंपनियां अब भी भारी नुकसान झेल रही हैं. संपादकीय के मुताबिक, ये संस्थाएं लंबे समय से चली आ रही संरचनात्मक खामियों और परिचालन अक्षमताओं से जूझ रही हैं. इन समस्याओं पर चर्चा तो बार बार होती है, लेकिन ठोस सुधार की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते.

कागजों पर जीडीपी बढ़ा रही सरकार
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान सरकार ऐसे क्षेत्रों को बढ़ावा दे रही है, जहां केवल कागजी तौर पर जीडीपी में बढ़ोतरी दिखाई देती है. रियल एस्टेट इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां अमीर वर्ग अपनी संपत्ति निवेश कर उसे बढ़ाता है, लेकिन इससे वास्तविक व्यावसायिक निवेश या रोजगार सृजन को कोई खास लाभ नहीं मिल रहा.

गरीब और अमीर के बीच बढ़ती खाई
रिपोर्ट के अनुसार, 2019 के बाद से पाकिस्तान के सबसे गरीब 20 प्रतिशत परिवारों की वास्तविक मासिक आय में करीब 12 प्रतिशत की गिरावट आई है. इसके उलट, सबसे अमीर वर्ग की आय में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यह स्थिति तब है, जब देश की अर्थव्यवस्था गिरावट के दौर से गुजर रही थी, सार्वजनिक क्षेत्र के बाहर औसत वेतन घट रहा था और गरीबी तेजी से बढ़ी थी.

आम लोगों की बचत लगभग खत्म
रिपोर्ट में बताया गया है कि आम लोगों की बचत लगभग समाप्त हो चुकी है. कुल मिलाकर बचत में 66 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है, क्योंकि परिवार रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए अपनी जमा पूंजी खर्च करने को मजबूर हैं. इसका सीधा असर स्वास्थ्य और शिक्षा पर पड़ा है, जहां खर्च में करीब 19 प्रतिशत की गिरावट आई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा हालात पाकिस्तान के भविष्य के लिए बेहद चिंताजनक संकेत हैं. अगर जल्द ही संरचनात्मक सुधार और ठोस आर्थिक फैसले नहीं लिए गए, तो देश की आर्थिक स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है.



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