‘कोई अकेला नहीं रहेगा…’, अमेरिका बोला- झगड़ालू चीन से निपटने के लिए सहयोगियों को तकनीक देने को तैयार



दक्षिण चीन सागर में बढ़ती तनातनी के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों को ऐसी तकनीकें और उपकरण उपलब्ध कराएगा, जिनकी मदद से वे चीन की ‘आक्रामक गतिविधियों’ का मिलकर मुकाबला कर सकें. कुआलालंपुर में आयोजित बहुपक्षीय बैठकों में उन्होंने चीन पर दक्षिण चीन सागर में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि वॉशिंगटन अपने साझेदारों को अकेला नहीं छोड़ेगा.

दक्षिण चीन सागर में चीन की कार्रवाई पर अमेरिका ने साधा निशाना
हेगसेथ ने आसियान देशों के रक्षा मंत्रियों के सामने कहा कि चीन ने पड़ोसी देशों की संप्रभुता का सम्मान नहीं किया है और उसकी नीतियां क्षेत्र की स्थिरता को चुनौती दे रही हैं. उन्होंने कहा, ‘दक्षिण चीन सागर और अन्य क्षेत्रों में चीन की आक्रामकता के खतरों को आप रोजाना महसूस करते हैं. हमें अपनी संयुक्त क्षमताएं बढ़ानी होंगी और समुद्री गतिविधियों की बेहतर निगरानी के लिए तकनीकी सहयोग विकसित करना होगा, ताकि कोई भी देश अकेला न रहे.’ उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इनोवेशन और तकनीक को तेजी से बढ़ाने में सक्षम है और वह इन्हें अपने साझेदारों के साथ साझा करना चाहता है.

चीनी कोस्ट गार्ड की तैनाती पर बढ़ी चिंता
हेगसेथ की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फिलीपींस और अमेरिका की सेनाओं ने दक्षिण चीन सागर में संयुक्त अभ्यास किया. चीन ने इस कार्रवाई को ‘क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के खिलाफ’ बताया. चीन दक्षिण चीन सागर के लगभग पूरे क्षेत्र पर दावा करता है, जो ब्रुनेई, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के विशेष आर्थिक क्षेत्रों से टकराता है. चीन ने तट रक्षक जहाजों का एक विशाल बेड़ा समुद्र में तैनात किया है, जिसकी कई बार फिलीपींस, मलेशिया और वियतनाम के जहाजों से झड़प हो चुकी है.

हालांकि चीन का कहना है कि उसकी कार्रवाई रक्षात्मक है और उसके तट रक्षक पेशेवर तरीके से काम कर रहे हैं. चीनी रक्षा मंत्री डोंग जुन ने शुक्रवार को कहा था कि चीन और आसियान को ‘पूर्वी ताकत को एकजुट’ करते हुए दक्षिण चीन सागर में शांति और स्थिरता को बनाए रखना चाहिए.

ट्रंप की परमाणु परीक्षण टिप्पणी के बाद बढ़ा तनाव
हेगसेथ की यह यात्रा ऐसे समय हुई जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने अमेरिकी सेना को ‘हमारे परमाणु हथियारों का परीक्षण शुरू करने’ का निर्देश दिया है. यह निर्देश 33 साल बाद परमाणु परीक्षण के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप का मतलब परमाणु विस्फोट परीक्षण से है या फिर परमाणु-सक्षम मिसाइलों के परीक्षण से. जब हेगसेथ से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि रक्षा विभाग जल्द स्पष्टीकरण देगा, लेकिन ‘सक्षम परमाणु ताकत का परीक्षण करना समझदारी है.’

इंडो-पैसिफिक में गठबंधन मजबूत करने का संकेत
हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका शांति का समर्थक है लेकिन चीन की गतिविधियों पर करीबी नजर रखी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक ऐसी सेना बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे वैश्विक स्तर पर कोई मुकाबला न कर सके. उन्होंने आगे कहा कि चीन के साथ संवाद महत्वपूर्ण है और अपने चीनी समकक्ष से हुई बातचीत उपयोगी रही, लेकिन यह भी चेतावनी दी कि बीजिंग की गतिविधियों पर लगातार नजर रखनी होगी. आसियान रक्षा मंत्रियों से उन्होंने कहा, ‘हम संघर्ष नहीं चाहते, हम शांति चाहते हैं. लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि चीन न तो आप पर और न ही किसी और पर अपना वर्चस्व स्थापित कर सके.’



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