कौन था वो क्रूर मुगल बादशाह, जिसने अपनी शहजादी के आशिक को पानी में उबालकर मरवा दिया?


मुगल बादशाह अपनी शौक और कई शादियों के लिए मशहूर रहे, लेकिन जब बात उनकी बेटियों की शादी की आती थी, तो वे बेहद सतर्क हो जाते थे. उन्हें हमेशा यह डर सताता था कि कहीं उनका दामाद सत्ता पर कब्जा न कर ले. यही कारण है कि मुगलों ने अपनी बेटियों की शादियां प्रायः सगे-संबंधियों में कीं. कई शहजादियां जीवनभर कुंवारी ही रहीं. यह परंपरा बादशाह अकबर के समय से चली आ रही थी.

शाहजहां की बेटी जहांआरा बेगम भी उन्हीं शहजादियों में से एक थीं, जो कभी शादी नहीं कर सकीं. शाहजहां अपनी बेटी से बेहद मोहब्बत करते थे और चाहते थे कि कोई भी अजनबी पुरुष उनके करीब न पहुंचे. शहजादी की सुरक्षा इतनी कड़ी थी कि बाहरी व्यक्ति का पहुंचना लगभग असंभव था. जहांआरा बेगम के महल के हर दरवाजे पर प्रहरी तैनात थे और उनके हर कदम पर नजर रखी जाती थी.

इतिहास में एक उल्लेखनीय घटना

फिर भी इतिहास में एक उल्लेखनीय घटना दर्ज है, जिसे 17वीं शताब्दी में फ्रांसीसी चिकित्सक फ्रेंकोइस बर्नियर ने लिखा. बर्नियर दाराशिकोह, शाहजहां के बड़े बेटे और मुगलों के राजकुमार के निजी चिकित्सक थे. इस दौरान उन्हें मुगल दरबार की कई कहानियां सुनने और देखने का मौका मिला.

किस बात से नाराज हुए शाहजहां?

बर्नियर के अनुसार, एक बार जहांआरा से प्रभावित होकर एक युवक उनसे मिलने में सफल हो गया. यह घटना शाहजहां के लिए बेहद असहनीय थी. जैसे ही उन्हें इसकी जानकारी मिली, वे गुस्से से आगबबूला हो उठे. उन्होंने तुरंत आदेश दिया कि उस युवक को पकड़ लिया जाए और उसे उचित दंड दिया जाए. इससे यह स्पष्ट होता है कि मुगल बादशाह अपनी बेटियों की सुरक्षा को कितना गंभीरता से लेते थे.

जहांआरा बेगम की कहानी केवल मुगलों के कठोर नियमों का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह उनके परिवार में सत्तासंतुलन और सुरक्षा की राजनीति को भी दर्शाती है. उनकी जीवनशैली और विवाह न करने का फैसला यह साबित करता है कि सत्ता और सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत स्वतंत्रता को भी कभी-कभी त्यागना पड़ता था.

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