लंदन में निर्वासन में रह रहीं प्रसिद्ध बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने मंगलवार (30 दिसंबर, 2025) को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के निधन के बाद उनकी कड़ी आलोचना की है. तसलीमा ने खालिदा जिया पर उनके शासनकाल के दौरान अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ रुख अपनाने और कई किताबों पर बैन लगाने का आरोप लगाया. तसलीमा ने खालिदा जिया को लेकर यहां तक कह दिया कि उन्होंने अपने सत्ताकाल में जिहादियों का साथ दिया था.
तसलीमा नसरीन ने X पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें उन्होंने तीखे शब्दों के जरिए खालिदा जिया की आलोचना की. उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या खालिदा जिया की मौत के बाद उनकी 31 साल का लंबे निर्वासन की सजा खत्म होगी, क्या उन किताबों पर से बैन हटाया जाएगा, जिन पर उनके सत्ता के दौरान बैन लगाया गया था. तसलीमा ने कुछ किताबों की लिस्ट भी शेयर की, जिसके बारे में उन्होंने दावा किया कि खालिदा जिया ने उन्हें बैन किया था. इसमें लज्जा, उतल हवा, का और दोज डार्क डेज शामिल हैं.
सोशल मीडिया पोस्ट में क्या बोलीं तसलीमा नसरीन?
बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने कहा, ‘खालिदा जिया की मौत हो चुकी है. उनकी उम्र 80 साल थी. वह एक गृहिणी से पार्टी चीफ बनीं और फिर 10 सालों तक देश की प्रधानमंत्री भी रहीं. उन्होंने एक सफल और लंबा जीवन जिया. शेख हसीना ने उन्हें दो साल के लिए जेल में रखा था, उसके अलावा मुझे नहीं लगता है कि 1981 के बाद उन्होंने कभी ज्यादा तकलीफें झेली हैं. बीमारियों से तो हर कोई जूझता है, वह भी इससे होकर गुजरीं.’
Khaleda Zia has passed away. She was 80 years old. From a housewife she became a party chief, and served as the country’s prime minister for ten years. She lived a successful life—a long life. Sheikh Hasina kept her in jail for two years; apart from that period, I don’t think she…
— taslima nasreen (@taslimanasreen) December 30, 2025
उन्होंने कहा, ‘मैं सोच रही हूं कि क्या उनकी मौत के साथ उन सभी किताबों पर लगे बैन नहीं हटेंगे, जिन्हें उन्होंने बैन किया था? उन्हें हटाया जाना चाहिए. उन्होंने 1993 में मेरी लज्जा पर बैन लगाया. 2002 में उतल हवा, 2003 में का और 2004 में दोज डार्क डेज पर बैन लगाया. जब खालिदा जिया जिंदा थीं, तब उन्होंने इन किताबों पर से बैन हटाकर अभिव्यक्ति की आजादी के पक्ष में कोई कदम नहीं उठाया. अगर उनकी मौत अब अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा का कारण बनती है, तो ऐसा ही सही.’
तसलीमा ने अपने खिलाफ की गई कार्रवाइयों का किया जिक्र
इस दौरान तसलीमा नसरीन ने खालिदा जिया के शासनकाल में अपने खिलाफ दर्ज मामलों और कानूनी कार्रवाइयों का जिक्र करते हुए कहा, ‘साल 1994 में उन्होंने जिहादियों का साथ देते हुए एक सेक्युलर, मानवतावादी, फेमिलिस्ट और आजाद ख्याल रखने वाली लेखिका के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने का मामला का दर्ज कराया.’ उन्होंने अपने बारे में बताते हुए कहा कि खालिदा जिया ने उस लेखिका के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया. इसके बाद उन्होंने उस लेखिका, यानी तसलीमा नसरीन, को अपने ही देश से गलत तरीके से बाहर निकाल दिया.
उन्होंने कहा, ‘अपने शासनकाल के दौरान उन्होंने मुझे अपने घर, अपने देश लौटने की अनुमति नहीं दी. क्या उनकी मौत मेरी 31 साल लंबे निर्वासन की सजा का अंत करेगी? या फिर अन्यायी शासक एक के बाद एक, पीढ़ी दर पीढ़ी इसी तरह से अन्याय करते रहेंगे?’
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