क्या भारत ने चाबहार पोर्ट से बनाई दूरी, शक्सगाम घाटी पर भारत के रुख पर विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?


ईरान में बनी राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है. साथ ही चाबहार पोर्ट छोड़ने की खबरों का खंडन विदेश मंत्रालय की तरफ से किया गया है. इसके अलावा शक्सगाम घाटी पर भी भारत के रुख को फिर से दोहराया है.  

शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि ईरान के हालातों पर भारत सरकार की नजर बनी हुई है. ईरान में हमारे 9 हजार नागरिक रहते हैं. इनमें पढ़ने वाले बच्चे, श्रद्धालु, व्यवसायी शामिल हैं. सभी को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है. 

उन्होंने कहा कि ईरान न जाएं और अगर वहां से आना चाहते हैं तो उसके भी प्रबंध कराए जा रहे हैं. ईरान छोड़ने की योजना बना रहे भारतीय नागरिकों के लिए कमर्शियल फ्लाइट के भी ऑप्शन उपलब्ध हैं. ईरान के साथ हमारे लंबे समय से गहरे रिश्ते और पार्टनरशिप है. हम बदलती हुई स्थिति पर नजर रख रहे हैं.

ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर अमेरिका के 25% टैरिफ आदेश पर क्या बोले?
साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से लगाया गया ईरान से बिजनेस करने वाले देशों पर 25% टैरिफ पर भी विदेश मंत्रालय ने अपनी बात रखी. जायसवाल ने कहा, ‘हम घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहे हैं. हमारा द्विपक्षीय व्यापार  $1.6 बिलियन है. हमारा निर्यात  $1.2 बिलियन है और आयात $0.4 बिलियन है. दोनों पक्षों के बीच चर्चा चल रही है. 

चाबहार पोर्ट विवाद पर क्या कहा? 
उन्होंने चाबहार पोर्ट विवाद पर कहा कि 28 अक्टूबर 2025 को अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने 26 अप्रैल 2026 तक वैलिड कंडीशनल सैंक्शन वेवर पर गाइडेंस देते हुए एक लेटर जारी किया था. हम इसकी व्यवस्था पर काम करने के लिए अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत कर रहे हैं. हमें पता चला है कि सलमान खान की एक फिल्म बनाने की योजना बनाई जा रही है. भारत में फिल्म निर्माण से जुड़े मामलों पर संबंधित अधिकारियों की नजर है. ऐसे प्रोजेक्ट्स में विदेश मंत्रालय की कोई भूमिका नहीं है. साथ ही भारत, जापान ने आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन पर चर्चा की है.

भारत ने शक्सगाम घाटी पर अपना रुख दोहराया

शक्सगाम घाटी पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने शक्सगाम घाटी पर अपना रुख दोहराया. शक्सगाम घाटी भारतीय क्षेत्र है. हमने 1963 में हस्ताक्षरित तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है. हमने लगातार कहा है कि यह समझौता अवैध और अमान्य है. हम तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को भी मान्यता नहीं देते हैं, जो पाकिस्तान के जबरन और अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरता है.

म्यांमार चुनाव पर क्या है भारत का पक्ष?
विदेश मंत्रालय प्रवक्ता ने म्यांमार में चुनाव पर कहा कि हम म्यांमार में सही से और शांति से चुनाव की उम्मीद कर रहे हैं, हमारी नजर बनी हुई है. इसके अलावा उन्होंने भारत, EU FTA बातचीत  पर कहा कि चर्चा आगे बढ़ रही है. उन्होंने 2026 गणतंत्र दिवस के लिए यूरोपीय नेताओं के भारत आने की बात को दोहराया है.



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