क्या यूरोपियन यूनियन के साथ FTA से प्रेशर में थे ट्रंप? एक्सपर्ट्स ने बताया क्यों 6 दिन के अंदर अमेरिका ने भारत से कर ली डील


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सोमवार (2 फरवरी, 2025) को न सिर्फ भारत के साथ ट्रेड डील और टैरिफ घटाने की घोषणा की, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ भी की. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप के रुख में इस बड़े बदलाव का कारण यूरोपियन यूनियन के साथ हाल ही में हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) हो सकता है. उनका कहना है कि एफटीए की वजह से अमेरिका पर भारत के साथ व्यापार समझौता करने का दबाव बना.

एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट में दक्षिण एशिया इनिशिएटिव्स की डायरेक्टर फरवा आमेर ने सोमवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर भले ही पहले से बातें चल रही थीं, लेकिन यूरोपीय संघ के साथ हुई डील ने अमेरिका के लिए इस प्रक्रिया को तेज करने की भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि समझौते का समय भी दिलचस्प है, क्योंकि यह ठीक यूरोपीय संघ के एफटीए के तुरंत बाद सामने आया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता हो गया है. इसके तहत अमेरिका भारत से होने वाले निर्यात पर शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा. व्हाइट हाउस के मुताबिक, अमेरिका रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत का अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क भी हटा लेगा. करीब एक साल तक चली बातचीत के बाद यह सफलता मिली. इस दौरान दोनों देशों के बीच बातचीत कई बार मुश्किल दौर से भी गुजरी. इस समझौते की घोषणा पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत के बाद की गई.

फरवा आमेर ने कहा कि भारत के लिए रूस से जुड़े सवाल अभी भी अहम हैं. भले ही भारत अपने तेल आयात में बदलाव कर रहा हो, लेकिन वह रूस के साथ अपने रिश्ते संतुलित रखना चाहता है. आमेर ने कहा, ‘भारत के लिए, रूस का सवाल बना हुआ है. भले ही उसने रूस से अपने तेल आयात ढांचे को बदल दिया है और बदलेगा, भारत फिर भी संबंधों को स्थिर रखना चाहेगा. जहां तक भारत-अमेरिकी ट्रेड डील की बात है तो शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर हुई बातचीत ने इस समझौते को संभव बनाया.’

एक अन्य ट्रेड एक्सपर्ट वेंडी कटलर का कहना है कि इस समझौते से भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों की तुलना में फायदा मिलेगा. अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत शुल्क लगेगा, जबकि आसियान देशों पर यह शुल्क 19 से 20 प्रतिशत के बीच रहेगा. इससे भारतीय निर्यातकों को थोड़ी बढ़त मिलेगी.

एएसपीआई की सीनियर वाइस प्रेजीडेंट और पूर्व कार्यवाहक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि, कटलर ने कहा कि यह संभावना है कि अमेरिका को ईयू की तुलना में बेहतर डील मिली है. उन्होंने बताया कि भारत ने शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने की बात कही है, लेकिन इस पर राष्ट्रपति ट्रंप की भाषा साफ नहीं है. हालांकि ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि भारत अमेरिका के खिलाफ शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को शून्य तक लाने की दिशा में आगे बढ़ेगा.

कुल मिलाकर, कटलर ने कहा कि भारत-अमेरिका समझौता अमेरिका और भारत के लिए महत्वपूर्ण खनिजों, टेक्नोलॉजी सहयोग और सप्लाई चेन लचीलेपन से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण मामलों पर मिलकर काम करने का रास्ता साफ करेगा. इसी बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर अमेरिका के दौरे पर रवाना हुए हैं, जहां वह महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर होने वाली मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे.

 



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