संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपने कॉमर्शियल कंपनी लॉ में संशोधन किया है, जिसके तहत देश में स्थापित कंपनियों को आधिकारिक तौर पर नागरिकता का दर्जा दिया जाएगा. इसका मतलब ये नहीं है कि कंपनी के मालिक या इन्वेस्टर यूएई के नागरिक बन जाएंगे, बल्कि कानून के तहत वो कंपनी संयुक्त अरब अमीरात की कंपनी के रूप में मान्यता हासिल कर लेगी.
यूएई के वित्त और पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री के अनुसार, यह नया प्रावधान उनके देश में कहीं भी स्थापित बिजनेस पर लागू होता है, जिसमें मैनलैंड (Mainland) और फ्री-जोन (Free-Zone) कंपनियां दोनों शामिल हैं. इसका मतलब ये है कि अब फाइनेंशियल फ्री-जोन में स्थित कंपनियों को भी पूर्ण यूएई कॉर्पोरेट की पहचान मिलेगी. अधिकारियों का कहना है कि जिस प्रकार जर्मनी में रजिस्टर्ड व्यवसाय को जर्मन कंपनी माना जाता है, उसी प्रकार यूएई में फर्मों को इस कानून के तहत अमीराती कंपनियों के रूप में मान्यता दी जाएगी.
यूएई कॉर्पोरेट नागरिकता कानून 2026
यह कानून किसी कंपनी के मालिकों या शेयरधारकों को व्यक्तिगत यूएई की नागरिकता प्रदान नहीं करता है. वित्त मंत्री अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि यूएई की नागरिकता के लिए अलग कानून है. इसे इस तरह से समझ सकते हैं कि अगर आप लंदन में कोई कंपनी खोलते हैं को वह एक ब्रिटिश कंपनी है. यूएई में नया कानून इस बात की मान्यता देता है कि देश में कहीं भी कोई कंपनी स्थापित हो ग्लोबल स्तर पर उनकी पहचान यूएई की कंपनी के तौर पर होगी. इससे यूएई को एक अलग पहचान मिलेगी. वहां से निर्यात किए जाने वाले हर सामान पर यूएई ब्रांड का लेबल होगा.
यह किस पर लागू होता है?
अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि कॉर्पोरेट नागरिकता कानून कंपनी का कानूनी स्थिति के संदर्भ में है, न कि लोगों की व्यक्तिगत नागरिकता को लेकर है. यूएई की तरफ से ये स्पष्टीकरण तब आया जब यह सवाल उठा कि क्या विदेशी कंपनी के मालिक इस प्रावधान के तहत संयुक्त अरब अमीरात नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं.