ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने पहली बार शनिवार (17 जनवरी 2026) को टीवी पर दिए भाषण में माना कि ‘कई हजार’ लोग मारे गए हैं. उन्होंने कुछ मौतों को ‘अमानवीय और क्रूर’ बताया, लेकिन इसका जिम्मेदार अमेरिका और अन्य विदेशी ताकतों को ठहराया है.
खामेनेई के बयान में बड़ी बातें क्या थीं?
- अमेरिका ने प्रदर्शनों की साजिश रची और ट्रंप ने खुद हस्तक्षेप किया.
- ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों को प्रोत्साहित किया और सैन्य समर्थन’ का वादा किया.
- अमेरिका का लक्ष्य ईरान को ‘निगलना’ है.
- ट्रंप को ‘अपराधी’ कहा और कहा कि अपराधियों को सजा मिलेगी.
- ईरानी राष्ट्र ने ‘फितना’ (साजिश) को कुचल दिया है.
खामेनेई के बयान पर ट्रंप ने क्या प्रतिक्रिया दी?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Politico को दिए इंटरव्यू में खामेनेई की कड़ी आलोचना करते हुए कहा:
- ईरान में नया नेतृत्व ढूंढने का समय आ गया है.
- खामेनेई ‘बीमार आदमी’ हैं, जो देश को डर और मौत से चलाते हैं.
- नेतृत्व सम्मान से होता है, डर और मौत से नहीं.
- ईरान दुनिया की सबसे खराब जगह है क्योंकि खराब नेतृत्व है.
ट्रंप ने पहले प्रदर्शनकारियों से कहा था ‘मदद आ रही है’ और अगर हत्या जारी रही तो ‘बहुत मजबूत कार्रवाई’ की चेतावनी दी थी. हाल में उन्होंने कहा कि हत्याएं रुक गई हैं और फांसी की कोई योजना नहीं है, लेकिन स्थिति पर नजर रख रहे हैं.
सरकारी कार्रवाई और मौतों के आंकड़े क्या हैं?
सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर कड़ी कार्रवाई की. सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, इंटरनेट ब्लैकआउट लगाया और संचार बंद कर दिया. मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, 3,000 से ज्यादा मौतें हुई हैं, जिनमें बच्चे और आम नागरिक भी शामिल हैं. हजारों गिरफ्तारियां हुईं. खामेनेई ने कहा कि कुछ मौतें ‘अमानवीय और क्रूर तरीके’ से हुईं, लेकिन उन्हें विदेशी साजिश बताया गया है. उन्होंने प्रदर्शनकारियों को दो तरह के बताया- अमेरिका-इजराइल के समर्थित और प्रशिक्षित लोग और युवा जो इनके प्रभाव में आए.
मानवाधिकार संगठनों ने क्रैकडाउन की निंदा की
G7 देशों ने ईरान पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की बात कही है. संयुक्त राष्ट्र ने अधिकतम संयम बरतने की अपील की. ईरान ने अमेरिका-इजराइल पर सीधे आरोप लगाए और सबूत होने का दावा किया है, जबकि प्रदर्शन अब काफी कम हो गए हैं और तेहरान समेत अन्य शहरों में रोजमर्रा की जिंदगी सामान्य हो रही है. लेकिन इंटरनेट ब्लैकआउट जारी है और स्थिति नाजुक बनी हुई है. यह 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद सबसे घातक अशांति है.
ईरान में प्रदर्शन शुरू होने की वजह क्या थी?
प्रदर्शन 28 दिसंबर 2025 को शुरू हुए, जब तेहरान के व्यापारियों ने ईरानी रियाल के तेज गिरावट और महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतर आए. ईरान में महंगाई 40% के आसपास है, तेल और खाद्य पदार्थों की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं. जल्द ही ये आर्थिक शिकायतें राजनीतिक हो गईं और लोग इस्लामी गणराज्य और खामेनेई के शासन के खिलाफ नारे लगाने लगे. प्रदर्शन पूरे 31 प्रांतों में फैल गए, जहां ‘तानाशाह मौत’ जैसे नारे लगे और कुछ जगहों पर पूर्व राजशाही के प्रतीक दिखे.