Asif Ali Zardari News: पाकिस्तान अपनी आंतरिक नाकामियों से ध्यान भटकाने के लिए फिर से ‘भारत कार्ड’ खेल रहा है. राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का ताजा बयान इसी ओर इशारा करता है. संसद के मंच से एक ओर उन्होंने बातचीत की मेज पर आने का प्रस्ताव रखा, तो दूसरी ओर ‘जिम्मेदार परमाणु राष्ट्र’ होने की आड़ में भारत को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दे डाली.
सीएनएन-न्यूज़ 18 अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि आसिफ अली जरदारी ने अपने संबोधन में दावा किया कि भारतीय नेतृत्व एक और युद्ध की तैयारी कर रहा है. उन्होंने कहा, “एक आजीवन क्षेत्रीय शांति का पैरोकार होने के नाते मैं इसकी सलाह नहीं दूंगा. भारतीय नेताओं को युद्ध के मैदानों से हटकर सार्थक बातचीत की मेज पर आना चाहिए, क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा का यही एकमात्र रास्ता है.”
हालांकि शांति की अपील करते-करते जरदारी ने लहजा बदला और पाकिस्तान की परमाणु शक्ति का जिक्र कर दिया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक जिम्मेदार परमाणु देश है और अपनी जिम्मेदारी को समझता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर वह अपनी रक्षा करना भी बखूबी जानता है.
सिंधु जल संंधि पर बिलबिलाए जरदारी!
इतना ही नहीं सिंधु जल संधि को लेकर उन्होंने कहा, ”सिंधु जल संधि को निलंबित करने की भारत की अवैध कार्रवाई स्पष्ट रूप से जल-आतंकवाद है. भारत महत्वपूर्ण जल प्रवाहों का राजनीतिक लाभ उठाने के लिए दुरुपयोग कर रहा है.”
“India’s illegal actions placing the Indus Waters Treaty in abeyance is plain and simple hydro-terrorism — a weaponisation of vital water flows to exert political leverage.”
~ President Asif Ali Zardari, Address to Joint Session of Parliament. pic.twitter.com/V5ArEIiMSk
— The President of Pakistan (@PresOfPakistan) March 2, 2026
राजनीतिक पैंतरेबाजी- जरदारी के बयान पर भारत
भारतीय खुफिया सूत्रों ने जरदारी के इन बयानों को गंभीरता से लेने के बजाय इसे महज ‘राजनीतिक पैंतरेबाजी’ करार दिया है. सीएनएन-न्यूज़ 18 के सूत्रों के मुताबिक, यह भाषण केवल पाकिस्तान की जनता का ध्यान भटकाने के लिए दिया गया है. वर्तमान में पाकिस्तान एक साथ कई मोर्चों पर संकट से जूझ रहा है. एक तरफ जहां देश की आर्थिक स्थिति चरमराई हुई है, वहीं दूसरी तरफ अफगानिस्तान सीमा पर तनाव और आंतरिक सुरक्षा की समस्याएं गंभीर बनी हुई हैं.
भारत ने हमेशा यह साफ किया है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत तभी संभव है, जब वह अपनी जमीन से संचालित होने वाले आतंकी नेटवर्क के खिलाफ ठोस और सत्यापन योग्य कार्रवाई करे.