चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की नयी पंचवर्षीय योजना, ट्रंप की टैरिफ धमकियों पर सम्मेलन में करेगी चर्चा



चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी अपनी तीन दिवसीय वार्षिक नेतृत्व बैठक में अगले पांच साल की योजना, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शुल्क युद्ध के प्रभाव और सेना में जारी भ्रष्टाचार-विरोधी कार्रवाई पर चर्चा करेगी. मौजूदा आर्थिक स्थिति के अलावा, देश भर के वरिष्ठ पार्टी नेताओं वाले 370 सदस्यीय निकाय की पूर्ण बैठक में बदलते वैश्विक रणनीतिक माहौल पर चर्चा होने की उम्मीद है.

इस बैठक में ट्रंप की ओर से गाजा में बंधक संकट को समाप्त कराने के लिए युद्ध विराम स्थापित करने में अमेरिकी भूमिका का विस्तार करने और यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए रूस पर दबाव डालने के प्रयासों पर भी चर्चा होगी.

तीन दिवसीय बैठक में इन मुद्दों पर होगी चर्चा

पूर्व में की गई आधिकारिक घोषणा के अनुसार, 20-23 अक्टूबर तक बीजिंग में बंद कमरे में आयोजित होने वाले पूर्ण सत्र में राष्ट्रीय आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-2030) के निर्माण से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की जाएगी.

नई पंचवर्षीय योजना पर चर्चा में विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में जारी मंदी, घरेलू खपत में ठहराव, नयी उत्पादक शक्तियों की अतिरिक्त क्षमता, विशेष रूप से बड़ी मात्रा में उत्पादित ई-वाहनों और ट्रंप के शुल्क और निर्यात प्रतिबंधों के उन पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखे जाने की उम्मीद थी.

शीर्ष जनरलों के निष्कासित पर भी वार्ता

मंदी के अलावा, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पूर्ण बैठक से पहले दो शीर्ष जनरलों को निष्कासित करके सेना में अपने व्यापक भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को तेज कर दिया है, जिससे पार्टी में ‘शुद्धिकरण’ की अटकलें तेज हो गई हैं.

चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल झांग शियाओगांग ने कहा कि दो शीर्ष जनरलों के अलावा, सात पूर्व वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को भी CPC और सेना से निष्कासित कर दिया गया है. निष्कासित सात अधिकारी तीन-सितारा जनरल थे, जो सेना में प्रमुख पदों पर थे.

SCO शिखर सम्मेलन में उठे मुद्दों पर भी होगी बात

अपने हालिया भाषणों में, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पार्टी से दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाने और चीन और अन्य देशों पर ट्रंप के शुल्क युद्ध की पृष्ठभूमि में बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के चीन पर पड़ने वाले प्रभाव पर विचार करने को कह रहे हैं.

पूर्ण बैठक में पिछले कुछ सप्ताहों के घटनाक्रम पर भी चर्चा होने की उम्मीद है, जिसके दौरान चीन ने 31 अगस्त से एक सितंबर तक तियानजिन में SCO शिखर सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भाग लिया था.

PM मोदी की SCO के इतर चीन से गहन वार्ता

पीएम मोदी की चीन यात्रा, जो सात वर्षों में उनकी पहली यात्रा थी, महत्वपूर्ण मानी जा रही थी और यह अमेरिका और भारत के बीच बढ़ते मतभेदों की पृष्ठभूमि में हुई थी, विशेष रूप से रूस से भारत के तेल आयात को लेकर बैठक अहम थी. प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पूर्वी लद्दाख सैन्य गतिरोध के बाद रुके हुए संबंधों को पुनर्जीवित करने के लिए SCO के इतर गहन वार्ता की.

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