चीन और जापान के बीच बढ़ा तनाव, रूस ने उतारे Su-30 और Su-35 तो एक्शन में अमेरिका, उतार दिया B-2 बॉम्बर


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प्रशांत महासागर में महाशक्तियों के बीच टेंशन लगातार बढ़ती जा रही है. चीन और रूस की उत्तेजक कार्रवाई के जवाब में अमेरिका ने जापान के समर्थन में अपना बेहद खतरनाक बी-2 बॉम्बर उतार दिया है. अमेरिकी बॉम्बर को ईस्ट चाइना सी में जापान के एफ-35 और एफ-15 सहित कुल 10 फाइटर जेट्स के साथ पेट्रोलिंग करते हुए देखा जा सकता है, जिसका वीडियो भी जारी किया गया है. अमेरिका और जापान की ये कार्रवाई, इसी हफ्ते चीन और रूस के साझा एयर-पेट्रोलिंग के बाद सामने आई है.

चीन और रूस की वायु सेनाओं ने मंगलवार (9 दिसंबर, 2025) को एशिया-पैसिफिक (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में साझा एयर-पेट्रोलिंग की थी. इस पेट्रोलिंग में रूस के टीयू-95 स्ट्रेटेजिक मिसाइल कैरियर (बॉम्बर) ने चीन के एच-6 बॉम्बर्स के साथ ईस्ट चाइना सी, जापानी समंदर और पश्चिमी प्रशांत महासागर में हवाई गश्त की थी. इस दौरान रूस के सु-30, सु-35 और चीन के जे-16 फाइटर जेट ने इन बॉम्बर्स को कवर दिया.

चीन-रूस की साझा पेट्रोलिंग, जापान-साउथ कोरिया का विरोध

हालांकि, रूस ने दावा किया कि ये साझा पेट्रोलिंग अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत की गई थी, लेकिन जापान और दक्षिण कोरिया ने कड़ा ऐतराज जताया था. जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि चीन-रूस मिलकर जापान के खिलाफ ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जो चिंता का विषय है. 

दरअसल, जापान की नई प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने ईस्ट चाइना सी में अपने रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने की घोषणा की है. साथ ही ताइवान पर चीन के हमले के दौरान मदद की घोषणा भी की है. ऐसे में पिछले एक हफ्ते से चीन ने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर लियाओनिंग को पहली बार ट्रेनिंग मिशन पर ईस्ट चाइना सी में तैनात कर रखा है. इस दौरान विमानवाहक युद्धपोत से चीन के जे-15 विमानों ने उड़ान भरी थी.

चीन-जापान टेंशन के बीच रूस के बाद उतरा अमेरिका

ईस्ट चाइना सी पर जापान भी अपना दावा करता आया है और चीनी विमानों पर जापानी एयरस्पेस उल्लंघन का आरोप लगाया था. जापान ने अमेरिकी फाइटर जेट एफ-15 को चीनी लड़ाकू विमानों के खिलाफ स्क्रैम्बल किया था. इस दौरान दोनों देशों (चीन और जापान) ने एक-दूसरे के फाइटर जेट्स पर रडार जाम करने का आरोप लगाया था. चीन और जापान के बीच हुई झड़प के बाद रूस ने अपने टीयू-95 बॉम्बर को प्रशांत महासागर में एयर-पेट्रोलिंग के लिए तैनात किया था. अब अमेरिका भी इस तनाव में कूद पड़ा है.

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