मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच इराक और ईरान दोनों ने अपने-अपने रुख साफ कर दिए हैं. इराक ने जहां अमेरिकी सेना को सैन्य बेस देने से इनकार किया है, वहीं ईरान ने ब्रिटेन को कड़ा संदेश देते हुए संभावित कार्रवाई की चेतावनी दी है.
इराक का साफ रुख
इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से कहा कि अमेरिकी सेना को इराक में सैन्य बेस देना देश की संप्रभुता का उल्लंघन होगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि इराक अपनी जमीन पर विदेशी सैन्य मौजूदगी को बढ़ाने के पक्ष में नहीं है. इराकी सरकार का कहना है कि देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी इराकी सेना खुद संभाल सकती है. इसलिए अमेरिकी सेना को बेस देने की कोई जरूरत नहीं है.
संसद की मंजूरी जरूरी
सरकार ने यह भी साफ किया कि अमेरिकी सेना को बेस देने के मुद्दे पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. इस तरह के किसी भी कदम के लिए इराकी संसद की मंजूरी जरूरी होगी. इराक में अमेरिकी सेना की मौजूदगी लंबे समय से विवाद का विषय रही है. देश के भीतर इसे लेकर अलग-अलग राय सामने आती रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों पर ईरान के हालिया हमलों के बाद इराक ज्यादा सतर्क हो गया है और किसी बड़े संघर्ष से बचना चाहता है.
ईरान की ब्रिटेन को कड़ी चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर से साफ कहा कि अगर ब्रिटेन अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल अमेरिका को ईरान के खिलाफ करने देता है, तो इसे ईरान के खिलाफ सीधी कार्रवाई माना जाएगा.
जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
ईरान ने दो टूक कहा है कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा. इसका मतलब यह भी है कि जरूरत पड़ने पर ऐसे सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है.