अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता बंद हो गया है. ईरान इस रास्ते से सैनिकों को तैनात कर चुका है. होर्मुज से कई देशों के जहाज गुजरते हैं. इसकी वजह से भारत भी प्रभावित हुआ है. ट्रंप ने होर्मुज के मसले पर दुनिया के कई देशों का साथ मांगा था, लेकिन जर्मनी से उन्हें झटका लग गया है. जर्मनी ने कहा है कि यह इस युद्ध का NATO देशों से कोई लेना देना नहीं है.
बर्लिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की अपील का जवाब दिया है. जर्मनी की सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा, “इस युद्ध का NATO से कोई लेना-देना नहीं है. यह NATO का युद्ध नहीं है. युद्ध से पहले भी इसमें हिस्सा लेने पर विचार नहीं किया गया था और अब भी इस पर विचार नहीं किया जा रहा है.” जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल ने भी पत्रकारों से कहा कि उन्हें होर्मुज में NATO सदस्यों की कोई भूमिका नजर नहीं आती.
ट्रंप ने किन-किन देशों से मांगा था साथ
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ’ पर एक पोस्ट के जरिए चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देशों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाज भेजने की अपील की थी. उन्होंने इसके साथ ही कहा था कि अमेरिका ईरान को मिटा देगा और पूरी तरह तबाह करने के बाद ही युद्ध रोकेगा.
भारत समेत दुनिया के कई देशों के जहाज होर्मुज पार नहीं कर पाए. हालांकि दो भारतीय जहाजों नंदा देवी और शिवालिक को आने का रास्ता दे दिया गया. शिवालिक सोमवार (16 मार्च) को मुंद्रा पोर्ट पहुंचा. यह एलपीजी गैस लेकर भारत आया है. ईरान युद्ध की वजह से देश में एलपीजी गैस का संकट मंडरा रहा है. हालांकि सरकार ने दावा किया है कि देश में गैस की कमी नहीं होगी. हालांकि अभी भी भारत के कई जहाज होर्मुज को पार नहीं कर पाए हैं.
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