जारी रहेगी जंग…, पाक के जरिए भेजे US प्रस्ताव को तेहरान ने किया खारिज, ट्रंप बोले- ईरान अब नहीं बन सकता परमाणु संपन्न


West Asia Tensions: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच कूटनीतिक प्रयासों को बड़ा झटका लगा है. Iran ने Pakistan के जरिए भेजे गए सीजफायर प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिससे यह साफ हो गया है कि फिलहाल युद्ध रुकने की संभावना कम है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रस्ताव United States की ओर से आया था और इसमें 15 सूत्रीय योजना के जरिए संघर्ष को खत्म करने की कोशिश की गई थी, लेकिन तेहरान ने इसे “अव्यवहारिक और अनैतिक” बताते हुए ठुकरा दिया.

ईरान का नया प्रस्ताव

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Ismail Baghaei ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत का अनुभव अच्छा नहीं रहा है, इसलिए ऐसे प्रस्तावों पर भरोसा करना मुश्किल है. उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान युद्ध खत्म करने के खिलाफ नहीं है, लेकिन अस्थायी सीजफायर से वह सहमत नहीं है, क्योंकि इससे आगे संघर्ष और लंबा खिंच सकता है.

इसी बीच Islamic Republic News Agency के मुताबिक, ईरान ने खुद एक 10 सूत्रीय नया प्रस्ताव रखा है, जिसमें Strait of Hormuz को खोलने और उस पर लगे प्रतिबंधों को हटाने जैसी शर्तें शामिल हैं. ईरान का कहना है कि वह अपनी “वैध मांगों” से पीछे नहीं हटेगा और इन्हें कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी लड़ाकों को “साहसी” बताते हुए कहा कि बातचीत की संभावना बनी हुई है, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य यही है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके. यानी एक तरफ जहां कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ दोनों पक्षों की सख्त शर्तों के कारण समाधान अभी दूर नजर आ रहा है और संघर्ष के और लंबा खिंचने की आशंका बढ़ गई है.

 ट्रंप बोले- ईरानी फायटर साहसिक

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि “मंगलवार आखिरी डेडलाइन” है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका अब इस संघर्ष को लेकर निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है. ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि जब दुश्मन कमजोर होता है तो उसकी ज्यादा परवाह नहीं की जाती, लेकिन इस मामले में दुश्मन मजबूत है, इसलिए स्थिति अलग है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब वह पहले जैसा मजबूत नहीं रह गया है, इशारा साफ तौर पर Iran की ओर था.

इस बयान को विशेषज्ञ बेहद अहम मान रहे हैं, क्योंकि यह एक तरफ दबाव की रणनीति (pressure tactic) हो सकती है, वहीं दूसरी तरफ आने वाले दिनों में किसी बड़े सैन्य या कूटनीतिक फैसले का संकेत भी दे सकती है. अमेरिका की इस “डेडलाइन” वाली चेतावनी ने पहले से ही तनावपूर्ण माहौल को और ज्यादा गंभीर बना दिया है और अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे क्या कदम उठाए जाते हैं.

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