‘टैरिफ से ज्यादा पॉल्यूशन का खतरा…’, पूर्व IMF चीफ गीता गोपीनाथ ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर क्यों कहा ऐसा?


हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और आईएमएफ की पूर्व चीफ ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रदूषण के खतरे और नुकसान को लेकर एक बयान दिया है. उन्होंने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भारतीय मीडिया से चर्चा के दौरान यह बात कही है. उन्होंने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रदूषण का असर है. अब तक भारत पर लगाए गए किसी भी टैरिफ के असर से कई ज्यादा गंभीर है.  

क्या भारत दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बन सकता है? 

इंडिया टुडे के मुताबिक, गीता गोपीनाथ ने स्विट्जरलैंड के दावोस में क्या भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, इस शीर्षक पर आयोजित सत्र में भाग लिया था. उनके साथ पैनल में चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, उद्योगपति सुनील भारती मित्तल और IKEA के सीईओ जुवेनशियो मेज्टू हेरेरा शामिल थे. 

प्रदूषण आर्थिक स्थिती पर नहीं, जान का भी नुकसान करता है: गोपीनाथ

गीता गोपीनाथ ने कहा कि अगर भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रदूषण का असर देखें, तो यह भारत पर लगाए गए किसी भी टैरिफ के असर से ज्यादा गंभीर है. अगर भारत को जीडीपी की पर प्रदूषण लागत को देखें तो यह सिर्फ आर्थिक गतिविधियों पर असर नहीं है, बल्कि जान का नुकसान भी है. 

भारत में हर साल 17 लाख जानें प्रदूषण से जाती हैं: गोपीनाथ

उन्होंने वर्ल्ड बैंक की एक स्टडी का हवाला भी दिया. इसमें बताया गया है कि भारत में हर साल प्रदूषण से 1.7 मिलियन यानी 17 लाख लोगों की जान जाती है. यह भारत में होने वाली मौतों का 18% हिस्सा है. प्रदूषण भारत में एक समस्या है, यह स्वास्थ्य पर भी असर करता है. 

भारत को प्रदूषण से युद्ध स्तर पर निपटना होगा: गोपीनाथ

उन्होंने कहा कि प्रदूषण से युद्ध स्तर पर निपटना ही भारत के लिए आगे का रास्ता है. उन्होंने कहा कि भारत को पुराने रूल एंड रेगुलेशन से छुटकारा पाना चाहिए. इन्हें बिजनेस को पीछे धकेल रखा है. आर्थिक सुधारों के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए. खासकर जमीन और मजदूरों के मामले में. भारत के लिए प्रदूषण के खिलाफ जंग एक टॉप मिशन होना चाहिए. 



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