ट्रंप का रूस पर ‘डबल अटैक’, तेल कंपनियों पर लगाया बैन, जानें क्या भारत की बढ़ जाएगी टेंशन



अमेरिका ने रूस की दो तेल कंपनियों, रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगा दिए हैं. ये रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियां हैं और इस पर प्रतिबंध लगने से मॉस्को की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की पूरी संभावना है. ट्रंप प्रशासन ने इन कंपनियों पर यूक्रेन में जारी युद्ध के लिए रूस को फंडिंग करने का आरोप लगाया है. इस सब के बीच सबसे बड़ा सवाल ये बना हुआ है कि दो दिग्गज रूसी तेल कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध से भारत पर क्या असर पड़ेगा?

रूसी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

नए प्रतिबंधों का रूसी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की संभावना है, क्योंकि तेल और गैस उद्योगों से आने वाला टैक्स मॉस्को के बजट का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है. चीन-भारत रूसी तेल और एनर्जी का सबसे बड़ा खरीदार है. पिछले साल चीन ने रिकॉर्ड 100 मिलियन टन से अधिक रूसी कच्चा तेल खरीदा, जो बीजिंग के कुल ऊर्जा आयात का लगभग 20 फीसदी था. 2022 में रूस की ओर से यूक्रेन पर हमला करने के बाद से भारत रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है. इस साल भारत 9 महीने में रूस से प्रतिदिन 17 लाख बैरल तेल आयात किया है. 

दस्तावेजों की समीक्षा करने में जुटी सरकारी रिफाइनरियां

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय सरकारी रिफाइनरियां अपने रूसी तेल व्यापार दस्तावेजों की समीक्षा कर रही हैं. ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अमेरिका की ओर से प्रतिबंध लगाने के बाद भारत को रूस की इन दोनों कंपनियों से तेल की आपूर्ति नहीं होगी. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स सहित सरकारी रिफाइनरियां रूसी कच्चे तेल के लिए बिल ऑफ लैडिंग डॉक्यूमेंट की समीक्षा कर रही है.

अमेरिकी प्रतिबंधों का भारत पर क्या असर होगा? 

कंपनियों ने अभी तक इस मामले पर कोई बयान जारी नहीं किया है. वैसे भी भारतीय सरकारी रिफाइनरियां रोसनेफ्ट और लुकोइल से सीधे रूसी तेल नहीं ही खरीदती है. भारत रूसी कच्चे तेल की खरीद बिचौलियों के जरिए करता है. न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी प्रतिबंधों से रिलायंस इंडस्ट्रीज के रूस से कच्चे तेल के आयात पर असर पड़ने के आसार हैं, जबकि सरकारी रिफाइनरियां फिलहाल मध्यस्थ व्यापारियों के माध्यम से खरीद जारी रख सकती हैं.

रिलायंस इंडस्ट्रीज पर असर पड़ने की संभावना

रिपोर्ट के मुताबिक सरकार इन प्रतिबंधों के जोखिमों का आकलन कर रही है, लेकिन रूसी कच्चे तेल के प्रवाह को तुरंत रोकने की संभावना नहीं है क्योंकि वे अपनी आवश्यकता का सभी तेल व्यापारियों से खरीदते हैं जिनमें से अधिकतर यूरोपीय व्यापारी हैं (जो प्रतिबंधों के दायरे से बाहर हैं). रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को अपने आयात को फिर से संतुलित करना पड़ सकता है क्योंकि यह सीधे रूस की रोसनेफ्ट से कच्चा तेल खरीदती है.

रिलायंस ने दिसंबर 2024 में रूस की कंपनी रोसनेफ्ट (जो अब प्रतिबंधित है) के साथ 25 वर्ष तक प्रतिदिन 5 लाख बैरल रूसी तेल आयात करने के लिए एक सावधिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. यह बिचौलियों से भी तेल खरीदता है. जिन दो कंपनियों पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया है वह रोज 31 लाख बैरल तेल का निर्यात करती है. केवल रोसनेफ्ट वैश्विक तेल उत्पादन का छह प्रतिशत और रूस के कुल तेल उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा निर्यात करती है.

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