अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने के निमंत्रण को पाकिस्तान ने स्वीकार कर लिया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार (21 जनवरी 2026) को इस बात की पुष्टि की है. इजरायल और फिलिस्तीन के बीच स्थायी शांति लाने के लिए अमेरिका ने अलग-अलग देशों के नेताओं को ‘गाजा बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता भेजा, जिसमें भारत के पीएम नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं.
ट्रंप के ‘गाजा पीस बोर्ड’ में शामिल होगा पाकिस्तान
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने बताया, ‘संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर शहबाज शरीफ को दिए गए निमंत्रण के जवाब में पाकिस्तान शांति बोर्ड में शामिल होने की घोषणा करता है.’ बयान में आगे कहा गया कि पाकिस्तान को उम्मीद है कि इससे स्थायी सीजफायर लागू होगा और फिलिस्तीनियों के बीच मानवीय सहायता पहुंचेगी. साथ ही गाजा के पुनर्निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे.
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक बयान में कहा गया, ‘पाकिस्तान को यह भी उम्मीद है कि ट्रंप के इन प्रयासों से फिलिस्तीन के लोगों को आत्मनिर्भरता का अधिकार मिलेगा. यह राजनीतिक प्रक्रिया के तहत ही संभव हो सकता है, जो संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के अनुरूप होगी. इसके परिणामस्वरूप 1967 से पहले की सीमाओं पर आधारित एक स्वतंत्र, संप्रभु फिलिस्तीन की स्थापना होगी. फिलिस्तीनी भाइयों और बहनों को दुखों को समाप्त करने की दिशा में पाकिस्तान अपनी भूमिका निभाने के लिए तत्पर है.’
अमेरिका के कदम का यूएन ने स्वागत किया
संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिका की ओर से घोषित गाजा संघर्ष विराम के दूसरे चरण की शुरुआत का स्वागत किया है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव के उप-प्रवक्ता फरहान हक ने कहा कि कोई भी ऐसा कदम जो नागरिकों की पीड़ा को कम करता है और रिकवरी में मदद करता है, उसे यूएन एक सकारात्मक पहल मानता है.
वर्तमान में गाजा की स्थिति यह है कि लगभग 8 लाख लोग बाढ़ के गंभीर खतरे वाले क्षेत्रों में रहने को विवश हैं. संयुक्त राष्ट्र की सहायता समन्वय एजेंसी (ओसीएचए) ने बताया कि कुल आबादी का करीब 40 फीसदी हिस्सा यानी लगभग 8 लाख लोग, अब ऐसे क्षेत्रों में रह रहे हैं जो बाढ़ के खतरे वाले हैं और जहां सर्दियों के तूफान और भारी बारिश के कारण, उनके आश्रय स्थल आवास योग्य नहीं रहे हैं. साथ ही गाजा सिटी में 60 से अधिक आवासीय इमारतों के ढह जाने का खतरा मंडरा रहा है.