ट्रंप ने होर्मुज खोलने के लिए दिया अल्टीमेटम तो गुस्से से लाल हुआ ईरान, कहा- ’47 साल में…’


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए ईरान को अल्टीमेटम दिया है, जिस पर ईरान की प्रतिक्रिया सामने आई है. भारत में ईरानी सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने सोमवार को कहा कि ट्रंप की ईरान में युद्ध शुरू करना एक बड़ी गलती थी, जिसके व्यापक परिणाम हुए हैं.

ईरान के खिलाफ ट्रंप की चेतावनी पर प्रतिक्रिया देते हुए इलाही ने कहा कि ऐसे बयान अभूतपूर्व नहीं हैं और दशकों से चले आ रहे एक पैटर्न को दर्शाते हैं. उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, ‘यह कोई नई बात नहीं है. वे 47 वर्षों तक हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सके. वे अब कुछ नहीं बिगाड़ सकते.’

ट्रंप के दावे को इलाही ने किया खारिज

इलाही ने ट्रंप के उस दावे को भी खारिज कर दिया कि अमेरिका युद्ध जीत चुका है और उन्होंने संघर्ष की निरंतर अवधि का हवाला दिया. एएनआई के अनुसार, भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि ने कहा, ‘हम इसका जवाब युद्ध में और सड़कों पर दे सकते हैं. वे तीन दिनों के भीतर कुछ करना चाहते थे, लेकिन अब एक महीने से अधिक समय बीत चुका है.’

ईरान ने की भारत की विदेश नीति की तारीफ 

अमेरिका की आलोचना करते हुए भी इलाही ने तनाव कम करने और कूटनीति की ओर ध्यान केंद्रित करने पर बल दिया. उन्होंने कहा, ‘हमें शांति की बात करनी होगी. हमें दुनिया में शांति लानी होगी. भारतीय कूटनीति बहुत अच्छी है और वे इस मुद्दे में और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. शुरू से ही यह एक बहुत बड़ी गलती थी. यह सिर्फ ईरान के खिलाफ युद्ध नहीं था, बल्कि यह युद्ध सभी मनुष्यों के खिलाफ था; यह पूरी दुनिया के खिलाफ था. आप देखेंगे कि इस युद्ध का परिणाम यह है कि इस समय विभिन्न देशों में बहुत से लोग पीड़ित हैं.’

ट्रंप की भाषा पर क्या बोले इलाही?

इलाही ने यह भी कहा कि नेताओं की भाषा उनके व्यक्तिगत मूल्यों और दृष्टिकोण को दर्शाती है. उन्होंने कहा, ‘हर इंसान जिस भाषा का इस्तेमाल करता है, वह उसके व्यक्तित्व, मानवता और नैतिकता की अभिव्यक्ति होती है. इसलिए जो व्यक्ति अभद्र भाषा का प्रयोग करता है, इसका मतलब है कि यह उसका व्यक्तित्व है. यहां तक ​​कि कई अमेरिकी सीनेटरों ने भी ऐसी भाषा का इस्तेमाल करने से इनकार किया है.’

ईरान ने दुनिया के बड़े देशों से की ये अपील

ईरीनी प्रतिनिधि ने कहा, ‘इस युद्ध को रोकने में सभी देश बड़ी भूमिका निभा सकते हैं क्योंकि अब यह युद्ध बहुत से लोगों को प्रभावित कर रहा है. तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और यहां तक ​​कि माल ढुलाई की लागत भी बढ़ गई है. इसलिए मुझे लगता है कि यह बहुत आवश्यक और महत्वपूर्ण है कि मीडिया और विश्व नेताओं के एक साथ आने और राष्ट्रपति ट्रंप से इस युद्ध को रोकने का अनुरोध करने के लिए एक निश्चित समय निर्धारित किया जाए.’





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