त्रिपुरा के छात्र की देहरादून में लिंचिंग पर आया जमात-ए-इस्लामी हिंद का रिएक्शन, धामी सरकार से कर दी ये डिमांड


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जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने देश में ईसाई समुदाय और पूर्वोत्तर भारत से आने वाले नागरिकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा, उत्पीड़न और घृणा अपराधों पर गहरी चिंता व्यक्त की है. संगठन ने कहा कि इस तरह की घटनाएं भारत की बहुलतावादी और समावेशी पहचान के लिए गंभीर चुनौती है.

संगठन ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में प्रार्थना सभाओं में बाधा, दफनाने की प्रक्रियाओं को लेकर विवाद और धर्मांतरण विरोधी कानूनों के तहत लगाए जा रहे आरोप यदि समय रहते कानून और न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में हल नहीं किए गए, तो इससे भय और अविश्वास का माहौल पैदा होगा. संगठन ने विशेष रूप से त्योहारों के समय सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियों को और मजबूत करने की मांग की, ताकि क्रिसमस जैसे पर्व शांतिपूर्ण माहौल में मनाए जा सकें.

लिंचिंग की घटना की कड़ी निंदा की

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने त्रिपुरा के रहने वाले युवा एमबीए छात्र एंजेल चकमा की कथित लिंचिंग की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे नस्लीय पूर्वाग्रह और घृणा अपराध का परिणाम बताया. बयान में कहा गया कि यह घटना कानून व्यवस्था की विफलता और पूर्वोत्तर के नागरिकों के प्रति अन्यायीकरण की खतरनाक मानसिकता को उजागर करती है.

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने उत्तराखंड सरकार और पुलिस से मांग की कि सभी आरोपियों की त्वरित गिरफ्तारी हो, सख्त कानूनी प्रावधान लगाए जाएं, पीड़ित परिवार को न्याय और मुआवजा मिले और गवाहों को सुरक्षा प्रदान की जाए. साथ ही देश में नस्लीय और घृणा आधारित हिंसा के खिलाफ एक व्यापक राष्ट्रीय कानून की जरूरत पर बल दिया गया.

गरीबों और जरूरतमंदों के लिए शीतकालीन राहत अभियान

इस बीच, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने भीषण ठंड को देखते हुए उत्तर और पूर्वी भारत में गरीबों, बेघर लोगों और कमजोर वर्गों के लिए व्यापक कंबल वितरण अभियान चलाया है. संगठन ने कहा कि धर्म, जाति या पृष्ठभूमि से ऊपर उठकर जरूरतमंदों को राहत पहुंचाई जा रही है.

2026 को न्याय, शांति और एकता का वर्ष बनाने का आह्वान 

जमाअत ए-इस्लामी हिंद ने 2026 को न्याय, शांति, एकता और समावेशी सतत विकास का वर्ष घोषित करने का आह्वान किया है. संगठन ने कहा कि सांप्रदायिक बयानबाजी, नफरत फैलाने वाले भाषण, भीड़ हिंसा और धार्मिक भेदभाव देश की एकता को कमजोर कर रहे हैं.

संगठन का कहना है कि अंतर-धार्मिक संवाद, सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास ही देश को आगे ले जाने का रास्ता है. सभी धर्मों और समाज के नेताओं से आगे आकर शांति और न्याय की स्थापना में भूमिका निभाने की अपील की गई है. वहीं, अभिनेता शाहरुख खान को लेकर हो रहे विवाद के मामले में संगठन का कहना है कि देश संविधान और कानून से चलता है जिस तरह से लोग शाहरुख खान के मामले में बयान दे रहे हैं वह उचित नहीं है.

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