कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पिछले हफ्ते दावोस समिट में जो बातें कहीं, अब उससे वह पीछे हट गए हैं. अमेरिका के वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने इस बात की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि सोमवार (26 जनवरी, 2026) को मार्क कार्नी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात हुई, जिसमें वह दावोस स्पीच के दौरान कही गई अपनी बातों से पीछे हट गए हैं.
पिछले हफ्ते स्विटजरलैंड के दावोस में हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में मार्क कार्नी ने स्पीच दी, जिसमें उन्होंने अमेरिका पर निशाना साधा था. जाहिर है ये सुनकर ट्रंप काफी नाराज हुए और उन्होंने मार्क कार्नी को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्योता रद्द कर दिया. साथ ही 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की भी धमकी दी.
स्कॉट बेसेंट का कहना है कि मार्क कार्नी की ट्रंप से फोन पर बात हुई, जिसमें वह दावोस में की गई अपनी टिप्पणियों से पीछ हट गए. फॉक्स न्यूज पर एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ‘मैं आज ओवल ऑफिस में प्रेजीडेंट ट्रंप के साथ था. ट्रंप ने प्राइम मिनिस्टर मार्क कार्नी से बात की, और कार्नी अपनी टिप्पणियों से पूरी तरह मुकर गए.’ स्कॉट बेसेंट ने कहा कि जाहिर सी बात है कनाडा अमेरिका पर निर्भर है और अगर ट्रंप कनाडा पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगा देते हैं, तो यह उसके लिए बड़ी आपदा जैसी स्थिति होगी.
मार्क कार्नी ने दावोस में जो स्पीच दी थी, उसके लिए उन्हें स्टेंडिंग ओवेशन भी मिला था. हालांकि, इसकी वजह से उन्हें ट्रंप की नाराजगी का भी सामना करना पड़ा. दावोस में कार्नी ने कहा था, ‘दुनिया की मिडिल पावर्स को एकजुट होकर बड़ी ताकतों के प्रेशर का मुकाबला करना होगा.’ उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा, ‘सुपरपावर्स अब व्यापार को हथियार की तरह इस्तेमाल करने लगी हैं. टैरिफ को दबाव डालने के हथियार के रूप में, फाइनेंशियल सिस्टम को जबरदस्ती करने के लिए और सप्लाई चेन की कमजोरियों का गलत फायदा उठाया जा रहा है.’
मार्क कार्नी ने कहा था, ‘मिडिल पावर्स को एकजुट होकर काम करना चाहिए क्योंकि अगर आप टेबल पर साथ नहीं होंगे तो आप मेन्यू में नजर आएंगे.’ इस स्पीच के बाद ट्रंप ने उन्हें बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्योत रद्द कर दिया था. बोर्ड ऑफ पीस ट्रंप की ओर से प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसका मकसद गाजा में इजरायल-हमास संघर्ष के बाद शांति और पुननिर्माण की निगरानी करना है. बोर्ड की स्थाई सदस्यता के लिए एक अरब डॉलर का योगदान जरूरी है, जबकि भुगतान नहीं करने वाले देशों को तीन साल का कार्यकाल मिलेगा. बोर्ड ऑफ पीस को लेकर मार्क कार्नी ने कहा था कि वह इसमें शामिल होना चाहते हैं, लेकिन फीस की शर्तों को लेकर वह अभी फैसला नहीं ले पाए हैं.
यह भी पढ़ें:-
चीन के टॉप सैन्य अधिकारी ने परमाणु दस्तावेज लीक किए! अमेरिका का मददगार कैसे बना जिनपिंग का खास अफसर