दिव्यांगों के अनरिजर्व्ड पदों को लेकर SC का ऐतिहासिक फैसला, कहा- ये सभी कैटेगरी के लिए ओपन, बस योग्यता…


सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 अप्रैल, 2026) को कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों (PWD) के लिए अनरिजर्व्ड रिक्तियां ओपन पूल की तरह हैं. इन पर सेलेक्शन का मुख्य आधार योग्यता है यानी किसी भी सामाजिक या विशेष श्रेणी के पात्र उम्मीदवारों को इन रिक्तियों पर नियुक्त किया जा सकता है.

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द करते हुए यह फैसला सुनाया है, जिसमें कम अंक वाले सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार को ओबीसी कैंडिडेट पर प्राथमिकता दी गई थी. उन्होंने कहा कि अनरिजर्व्ड कैटेगरी कोई अलग सामाजिक श्रेणी नहीं है, बल्कि यह सभी के लिए एक खुला क्षेत्र है.

सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी कि ओबीसी, एससी या एसटी जैसी रिजर्व्ड कैटेगरी से संबंधित, अधिक योग्य पीडब्ल्यूडी उम्मीदवार को किसी अनारक्षित पीडब्ल्यूडी पद से सिर्फ इसलिए वंचित नहीं किया जा सकता, क्योंकि सामान्य श्रेणी का कोई अभ्यर्थी भी उपलब्ध है.

फैसला लिखने वाले जज जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह ने कहा, ‘आरक्षण कानून में यह बात पूरी तरह से तय है कि अनारक्षित/खुली श्रेणी का मतलब एससी, एसटी या ओबीसी जैसी किसी सामाजिक/सामुदायिक श्रेणी से नहीं है. दूसरे शब्दों में, अनारक्षित या खुली श्रेणी के तहत आने वाला कोई भी पद किसी खास सामाजिक श्रेणी से संबंधित नहीं होता; यह सभी कैटेगरी के अभ्यर्थियों के लिए एक खुला क्षेत्र होता है – इस अर्थ में कि यह सभी अभ्यर्थियों के लिए खुला है, चाहे वे किसी सामाजिक या विशेष श्रेणी से संबंधित हों या न हों.’

यह मामला पश्चिम बंगाल राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में कनिष्ठ अभियंता (सिविल) ग्रेड-2 के पद से संबंधित एक भर्ती से जुड़ा है. अधिसूचना में एक पद विशेष रूप से अनारक्षित (दिव्यांग व्यक्ति-कमजोर दृष्टि) के लिए आरक्षित था. इस पद के लिए दो अभ्यर्थियों के बीच विवाद था, इनमें एक जनरल कैटेगरी का था, जिसकी दृष्टि कमजोर थी और उसने 55.667 अंक प्राप्त किए, जबकि दूसरा अभ्यर्थी ओबीसी श्रेणी का था, जिसकी दृष्टि भी कमजोर थी और उसने 66.667 अंक प्राप्त किए.

कंपनी ने ओबीसी अभ्यर्थी को उसकी उच्च योग्यता के आधार पर इस पद पर नियुक्त कर दिया. जनरल कैटेगरी के अभ्यर्थी ने इस फैसले चुनौती देते हुए कहा कि वह एक योग्य अनारक्षित अभ्यर्थी है, इसलिए यह रिक्ति उसे ही मिलनी चाहिए थी और ओबीसी कैटेगरी के अभ्यर्थी के नाम पर विचार सिर्फ तभी किया जाना चाहिए, जब अनारक्षित श्रेणी का कोई दिव्यांग अभ्यर्थी उपलब्ध न हो.

हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने जनरल कैटेगरी के अभ्यर्थी की याचिका खारिज कर दी, जबकि खंडपीठ ने कंपनी के फैसले को पलटते हुए नियोक्ता को कम योग्यता वाले जनरल कैटेगरी के अभ्यर्थी को नियुक्त करने का निर्देश दिया. खंडपीठ के इस फैसले को कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी.

 

यह भी पढ़ें:-
सबरीमाला मामले पर सरकार ने की जोरदार बहस, SC की जज भी नहीं रुकीं, महावारी पर बोलीं- पर महिलाएं अछूत नहीं हो सकतीं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *