दुनिया को डराने वाली ईरान की नई प्लानिंग? परमाणु बम के करीब पहुंचा तेहरान, आखिरी अड़चन कर लिया पार


मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच ईरान ऐसा कदम उठाने जा रहा है, जो अमेरिका और इजरायल दोनों की निंद उड़ा देगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार कह रहे हैं कि ईरान पर हमला इसलिए किया गया क्योंकि वह परमाणु हथियार बनाने करीब था, जिससे वॉशिंगटन को खतरा था. वहीं अब ईरान की संसद में परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) से बाहर निकलने की चर्चा चल रही है. इस फैसले का मतलब होगा कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने के लिए स्वतंत्र होगा.

NPT से बाहर निकलने पर विचार कर रहा ईरान

एनपीटी से बाहर निकलने का मतलब होगा कि ईरान पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी खत्म हो जाएगी और ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने वाले प्रतिबंध हट जाएंगे. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि सरकार इस मामले पर विचार कर रही है और जल्द ही फैसला लिया जाएगा. ईरान के इस कदम को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है और इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ गई है. ईरान के एनपीटी से बाहर निकलने के फैसले का मतलब होगा कि वह परमाणु हथियार विकसित करने के लिए स्वतंत्र होगा.

परमाणु हथियार बनाने को लेकर ईरान का बयान

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार (30 मार्च 2026) को कहा, ऐसी संधि में शामिल होने का क्या फायदा, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हम पर दवाब डाला जाता है और अपने अधिकारों को लाभ नहीं लेने देते. इतना ही नहीं हमारे परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला भी करते हैं.’ हालांकि उन्हों साफ किया कि ईरान ने परमाणु हथियार बनाने की कोशिश न तो पहली की थी और न भविष्य में करेगा. ईरान का कहना है कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं कर रहा है, लेकिन वह परमाणु अप्रसार संधि पर अपनी स्थिति की समीक्षा कर रहा है.

पिछले साल अमेरिका ने परमाणु ठिकानों को बनाया था निशाना

पिछले साल जून में हुए 12 दिनों के संघर्ष के बाद ईरानी सांसदों ने एनपीटी से बाहर निकलने के विकल्प पर भी चर्चा की थी, जिस वजह से इजरायल और अमेरिका ने उस पर हमला किया था. तब ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों फोर्डो यूरेनियम संयंत्र, नतांज परमाणु संयंत्र और इस्फहान को निशाना बनाया था.

चार परमाणु हथियार संपन्न देश भारत, पाकिस्तान, इजरायल और उत्तर कोरिया एनपीटी ढांचे का हिस्सा नहीं हैं. इनमें से भारत, पाकिस्तान, इजरायल और दक्षिण सूडान ने कभी भी संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जबकि उत्तर कोरिया पहले इसमें शामिल हुआ था, लेकिन 2003 में इससे बाहर निकल गया.



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