PAK-Afghanistan War: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ शुक्रवार को रावलपिंडी स्थित देश के आर्मी हेडक्वार्टर पहुंचे. वहां उन्हें अफगानिस्तान के साथ चल रही सीमा पर हालिया झड़पों की जानकारी दी गई.
प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, शरीफ़ ने सीमा इलाकों में होने वाले हमलों को रोकने और जवाबी कार्रवाई करने में पाकिस्तानी सेना के प्रोफेशनलिज़्म की जमकर सराहना की.
‘पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच खुली लड़ाई’
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान अफगानिस्तान के साथ एक खुली लड़ाई में है. उन्होंने कहा कि अक्टूबर में कतर के बीच आने से जो सीजफायर हुआ था, उसके बाद से अब तक पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की ये लड़ाई सबसे बड़ी और खतरनाक झड़प बन गई है।
दोनों देशों का इतिहास और सीमा पर बढ़ती तनातनी
पाकिस्तान और अफगानिस्तान का लंबा और जटिल इतिहास है, जो 1947 में पाकिस्तान के निर्माण तक जाता है. दोनों देशों के बीच सामाजिक, जातीय और आर्थिक संबंधों के बावजूद रिश्ते अक्सर तनावपूर्ण रहे हैं और कई बार हथियारबंद टकराव तक पहुँच गए हैं. पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों की सीमा पर कई छोटे-मोटे संघर्ष हुए हैं. हालिया झड़प अब तक का सबसे गंभीर और खतरनाक मुकाबला माना जा रहा है.
तालिबान और TTP के खिलाफ सख्त संदेश
27 फरवरी को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ़ को सैन्य नेतृत्व ने अफगानिस्तान के साथ जारी ओपन वार के मौजूदा हालातों पर बेहद अहम ब्रीफिंग दी. इसमें सीमा पर बढ़ते तनाव और सैन्य कार्रवाइयों का पूरा ब्यौरा पेश किया गया. बैठक के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान में शहबाज़ शरीफ़ ने साफ कहा कि ‘फिटना अल-खवारिज’ (TTP) और अफगान तालिबान शासन के बीच बढ़ते गठजोड़ को अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने पाकिस्तानी सेना की काबिलियत की तारीफ की, जिसने काबुल और कंधार जैसे तालिबानी गढ़ों पर सीधे हवाई हमले कर उनके मंसूबों को नाकाम कर दिया.
जहां एक तरफ तालिबान अब इस भीषण गोलाबारी के बाद बातचीत की मेज पर आने की बात कर रहा है, वहीं शहबाज़ शरीफ ने इसे पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई मानते हुए अपनी सेना को किसी भी उकसावे का मुंहतोड़ जवाब देने की पूरी छूट दे दी.