नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन के लिए सरकार तैयार, बजट सत्र में लाया जा सकता है बिल


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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली केंद्र सरकार संसद के बजट सत्र में ही नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन लाने के लिए पूरी तरह से तैयार है. इसे लेकर सरकार सभी राजनीतिक दलों के साथ बातचीत कर रही है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज सोमवार (23 मार्च, 2026) को NDA के पार्लियामेंट्री फ्लोर लीडर्स की बैठक की.

बैठक में सहयोगी दलों ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों का सैद्धांतिक रूप से समर्थन किया. बैठक में केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू, उपेंद्र कुशवाहा, लल्लन सिंह, श्रीकांत शिंदे , मिलिंद देवड़ा, थंबीदुरई, अनुप्रिया पटेल, प्रफुल्ल पटेल और राजकुमार सांगवान समेत कई अन्य NDA सांसद मौजूद रहे.

NDA सांसदों की बैठक में क्या बोले गृह मंत्री अमित शाह?

सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिल में लाए जाने वाले संशोधनों को लेकर NDA सहयोगियों को विस्तृत रूप से जानकारी दी. इसके साथ-साथ कानून में क्या-क्या संशोधन लाए जाएंगे उसको लेकर सभी सहयोगियों को जानकारी दी.

सूत्रों के मुताबिक, 2029 के लोकसभा चुनावों से ही महिला आरक्षण लागू हो जाएगा. 2011 की जनगणना को परिसीमन के लिए बेस ईयर माना जाएगा, उसी के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. परिसीमन के बाद लोकसभा सदस्यों की नई संख्या 816 हो जाएगी, जिसमें से 33 प्रतिशत सीट महिलाओं के लिए रिजर्व की जाएंगी.

संशोधन के लिए सरकार दो बिल लाने की तैयारी में

इस संशोधन को लागू करने के लिए सरकार दो बिल लाने की तैयारी में है. एक बिल में डेलिमिटेशन कमिशन बनाने के लिए लाया जाएगा. जिसके तहत डेलिमिटेशन कमिशन सेट अप किया जाएगा. दूसरा बिल नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के रूप में लाया जाएगा. इसके तहत पुराने बिल में संशोधन किया जाएगा, क्योंकि पुराने बिल के मुताबिक ये कानून आगामी होने वाले डेलिमिटेशन प्रोसेस के बाद लागू होना था.

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सरकार के सूत्रों की मानें तो पहले जो बिल पास हुआ था, उसमें महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान था, अब इस बिल में आरक्षण देने की प्रक्रिया क्या होगी, उसका प्रारूप लाया जाएगा. इस बिल के मुताबिक जो सीट SC/ ST वर्ग की रिजर्व सीट महिलाओं के लिए होंगी, उनको भी 33 प्रतिशत के अंदर ही रखा जाएगा.

सभी क्षेत्रीय दलों ने संशोधन के लिए सैद्धांतिक रूप से जताई सहमति

सरकार के सूत्रों के मुताबिक, पहले दक्षिण भारत की कुछ पार्टियों ने नए परिसीमन को लेकर चिंता जाहिर की थी, उसके पीछे उत्तर भारतीय राज्यों के मुकाबले दक्षिण भारत के राज्यों में जनसंख्या में बढ़ोत्तरी की दर में कमी कारण बताया था. अब 2011 के जनसंख्या के आधार पर परिसीमन करने से उन सभी राज्यों की चिंता भी दूर हो गई है.

इसके अलावा, गृहमंत्री अमित शाह ने आज दिन में कई अन्य क्षेत्रीय दलों के नेताओं के साथ भी इस बिल को लेकर चर्चा की और उनके सुझाव मांगे. इन दलों की बात करें तो AIMIM, शिवसेना उद्धव गुट, NCP शरद पवार गुट, YSRCP समेत कुछ और दल भी शामिल थे. सूत्रों की मानें तो लगभग सभी क्षेत्रीय दल भी इस संशोधन पर सैद्धांतिक रूप से सहमति जता रहे हैं.

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