‘नौसेना का खत्मा, सत्ता परिवर्तन और यूरेनियम…’, यूएस-ईरान जंग में ट्रंप की इन 5 मंशाओं पर फिरा पानी


मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर को लेकर डोनाल्ड ट्रंप भले ही अपनी वाहवाही में लगे हुए हों, लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है. ट्रंप ने ईरान के खिलाफ संभावित बड़े सैन्य हमलों से पीछे हटते हुए दो हफ्ते के सशर्त सीजफायर की घोषणा की है. यह फैसला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की शर्त से जुड़ा है. इस घोषणा से दुनिया ने राहत की सांस तो ली है, लेकिन क्या इस जंग से यूएस ने वो बस हासिल कर लिया, जिसे लिए उसने ईरान पर हमला शुरू किया था.

IRGC को लेकर ट्रंप का बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे दोनों पक्षों का सीजफायर बताया है. इसका मतलब है कि यह समझौता इजरायल के साथ चल रहे युद्ध को भी समाप्त कर सकता है. हालांकि ट्रंप ने ये भी कहा कि शुरुआत में कुछ समय तक छिटपुट गोलीबारी जारी रह सकती है क्योंकि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की कई शाखाएं स्वतंत्र रूप से काम करती हैं और उनके बीच समन्वय में समय लग सकता है.

ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने ईरान का 10-पॉइंट प्लान पढ़ा है, लेकिन उन्होंने यह नहीं कहा कि वह इसके सभी बिंदुओं से सहमत हैं. युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका और ईरान के बीच मिसाइल क्षमता को लेकर ही वार्ता चल रही थी. ट्रंप प्रशासन का कहना था कि ईरान ऐसी मिसाइलें बना रहा है जो अमेरिका और यूरोप तक पहुंच सकती हैं. यहीं कारण है कि अमेरिका परमाणु सामग्री को हटाने और मिसाइल विकास पर रोक लगाने की मांग कर रहा था.

क्या ईरानी मिसाइल क्षमता को तबाह कर पाया यूएस?

जंग के दौरान ट्रंप ने कई बार दावा किया कि यूएस ने ईरान की मिसाइल क्षमता तबाह कर दिया है, लेकिन ईरान ने हर बार इस दावे को झूठा बताया. सीजफायर से पहले भी ट्रंप ने जिस तरह से सभ्यता मिटाने वाली धमकी दी थी उससे भी ये जाहिर होता है कि यूएस ईरानी मिसाइल क्षमता को नष्ट करने में नाकाम रहा. ट्रंप की धमकी के बाद ईरान ने कहा कि उसके पास अभी भी खतरनाक मिसाइलें मौजूद है, जिसका इस्तेमाल उसने अभी तक इस जंग के दौरान नहीं किया है.

ईरानी नेवी को खत्म करने के ट्रंप के दावे में कितनी सच्चाई?

ट्रंप प्रशासन ने ईरान की नौसेना को खत्म करने की कसम खाई थी उसमें भी उन्हें सफलता नहीं मिली. जंग के दौरान बार-बार ट्रंप ने ईरानी नौसेना और एयरफोर्स को पूरी तरह से तबाह करने की बात की थी, लेकिन उसके अगले ही दिन ईरान ने यूएस का फाइटर जेट मार गिराया. इसी तरह ट्रंप ईरानी नौसेना को खत्म करने का दावा करते रहे और दूसरी तरफ होर्मुज को पूरी तरह से खोलने के लिए यूरोप समेत दुनिया के दूसरे देशों से मदद भी मांगते रहे.

सत्ता परिवर्तन कराने में कितना सफल हुए ट्रंप?

अमरिका की ओर से युद्ध शुरू करने का मुख्य उद्देश्य सत्ता परिवर्तन बताया गया था. 28 फरवरी को हमले में तत्कालीन सुपीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई और तब ट्रंप ने दावा किया कि अब ईरान की सरकार बदल गई है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ट्रंप एक बयान दूसरे बयान से मेल नहीं खाते हैं. ट्रंप पहले कहते हैं कि हमने सत्ता परिवर्तन कर दिया है और नई सरकार से बात चल रही है. फिर वे कहते हैं कि नई सरकार हमारी बात नहीं मानेगी तो एक सभ्यता को खत्म कर देंगे. जिसका साफ मतलब है कि ट्रंप ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं करा पाए.

यूरेनियम एनरिचमेंट को लेकर ट्रंप का बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि अब ईरान में यूरेनियम एनरिचमेंट नहीं किया जाएगा और अमेरिका ईरान के साथ मिलकर भूमिगत परमाणु सामग्री को बाहर निकालने का काम करेगा. उन्होंने कहा कि पूरे क्षेत्र पर कड़ी सैटेलाइट निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी गतिविधि पर नजर रखी जा सके. हालांकि यूरेनियम एनरिचमेंट को लेकर ईरान पहले से यही कहता आया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और वह यूरेनियम का इस्तेमाल सिर्फ बिजली के लिए कर रहा है.

इजरायल और अमेरिका का उद्देश्य लेबनान में हिजबुल्लाह, यमन में हूती और इराक/सीरिया में सक्रिय ईरान समर्थित मिलिशिया के मिसाइल भंडार को नष्ट करना है. इस जंग के शुरू होने के बाद से हिजबुल्लाह लगातार इजरायल पर हमला करता रहा. सीजफायर के बाद एक बात तो साफ हो गई कि ईरान समर्थित गुटों को खत्म करने का अमेरिका का सपना धरा का धरा ही रह गया.

ये भी पढ़ें : सीजफायर के बाद भारत के हाथ लगी बड़ी जीत! 7 साल बाद देश आ रहा ईरानी तेल, पहले जा रहा था चीन



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *