न्यायपालिका पर सवालों वाली किताब पर सुप्रीम सख्त, 3 सदस्यीय कमिटी गठित, सुनवाई जारी


NCERT Controversy: स्कूली किताबों में न्यायपालिका को लेकर लिखी गई सामग्री को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अब एक 3 सदस्यीय कमिटी का गठन किया गया है, जो इन विषयों की समीक्षा करेगी. इस बारे में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कोर्ट के निर्देश पर 3 सदस्यीय कमिटी बनाई गई है. इस कमिटी में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा, वरिष्ठ वकील के के वेणुगोपाल और गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रकाश सिंह शामिल हैं. यह कमिटी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी भोपाल के साथ मिलकर काम करेगी.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला NCERT की कक्षा 8 की एक किताब से जुड़ा है. इस किताब में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ पर लिखे गए एक अध्याय को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया था. 26 फरवरी को कोर्ट ने इस किताब पर रोक लगा दी थी और वेबसाइट पर उपलब्ध इसकी पीडीएफ फाइल हटाने का भी आदेश दिया था. साथ ही डिपार्टमेंट ऑफ स्कूल एजुकेशन के सचिव और NCERT के निदेशक को नोटिस जारी किया गया था.

अभी जारी रहेगी सुनवाई

11 मार्च को हुई सुनवाई में संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुए और बिना शर्त माफी मांगी. उन्होंने कोर्ट को बताया कि किताब को वापस ले लिया गया है. चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस पर संतोष जताते हुए माफीनामा स्वीकार कर लिया. हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि वह अभी इस मामले की सुनवाई बंद नहीं करेगा.

विशेषज्ञों ने मांगी माफी

कोर्ट ने विवादित अध्याय के लिए जिम्मेदार मानते हुए तीन शिक्षा विशेषज्ञों को उनके पद से हटाने का आदेश दिया था. साथ ही यह भी कहा गया था कि केंद्र या राज्य सरकार से फंड पाने वाला कोई भी संस्थान इन तीनों से कोई संबंध न रखे. अब इन विशेषज्ञों मिशेल डेनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना ने कोर्ट में आवेदन दाखिल कर माफी मांगी है. सोमवार (6 अप्रैल) को कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई में उनकी दलीलें सुनी जाएंगी.

सोशल मीडिया पर भी नजर

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने उन वेबसाइट्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी भी मांगी थी, जिन पर न्यायपालिका के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणियां की गई थीं. कोर्ट ने कहा था कि ऐसे मामलों में जरूरी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. हालांकि सोमवार को इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई.



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