अफगानिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान अब खुलकर तालिबान शासन पर दबाव बनाने लगा है. काबुल से अपनी सुरक्षा मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलने के बाद इस्लामाबाद ने पहली बार संकेत दिया है कि यदि अफगान तालिबान उसके अनुरोधों को नजरअंदाज करता रहा तो वह अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन का समर्थन करने से भी पीछे नहीं हटेगा. पाकिस्तान का कहना है कि काबुल में मौजूदा शासन को चुनौती देने वाली किसी भी ताकत का वह साथ देने को तैयार है.
न्यूज़ 18 की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने यह चेतावनी तुर्किए के अधिकारियों के माध्यम से तालिबान तक पहुंचाई है. पाकिस्तान की मुख्य नाराजगी यह है कि अफगानिस्तान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा. जबकि काबुल महीनों से यह दोहराता आ रहा है कि उसका टीटीपी से कोई संबंध नहीं है और अफगान धरती का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए नहीं होने दिया जाता, इसलिए वह पाकिस्तान के साथ किसी लिखित समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा.
पूर्व नेताओं से पाकिस्तान के सीक्रेट संपर्क?
शीर्ष सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान अब एक नई रणनीति पर काम कर रहा है. बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियां अफगानिस्तान की पूर्व सरकार के प्रभावशाली नेताओं से संपर्क बना रही हैं. इसमें पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई, अशरफ गनी से लेकर अहमद मसूद और नॉर्दर्न अलायंस के प्रमुख अब्दुल राशिद दोस्तम तक शामिल हैं.
सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान इन नेताओं को अपने यहां पनाह देने की भी पेशकश कर रहा है ताकि वे इस्लामाबाद की जमीन से रहकर तालिबान शासन के खिलाफ आवाज उठा सकें और सत्ता परिवर्तन की मुहिम को गति मिल सके. यह संकेत पाकिस्तान की रणनीति में बड़ी और खतरनाक शिफ्ट दिखाता है.
तुर्किए और कतर की मध्यस्थता बेअसर
तुर्किए और कतर की मध्यस्थता में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तीन दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन इनमें कोई भी समाधान नहीं निकल सका. पाकिस्तान की मुख्य मांगें हैं कि तालिबान टीटीपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई करे. टीटीपी के आतंकियों को पाकिस्तान के हवाले किया जाए. डूरंड लाइन (Durand Line) के आसपास एक बफर जोन तैयार किया जाए, लेकिन तालिबान ने इन मांगों को स्वीकार करने के कोई संकेत नहीं दिए हैं.
अवैध अफगानों पर पाकिस्तान की कार्रवाई तेज
इस बीच पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में अवैध रूप से रह रहे अफगान नागरिकों पर कार्रवाई और तेज हो गई है. प्रदेश सरकार के अनुसार सिर्फ नवंबर महीने में ही 6,000 से अधिक अफगानों को निर्वासित कर वापस भेजा जा चुका है. सरकार ने स्थानीय नागरिकों को प्रोत्साहित करने के लिए यहां तक घोषणा की है कि जो लोग गैर-कानूनी अफगान निवासियों की सूचना देंगे, उन्हें नकद इनाम दिया जाएगा.
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