‘पश्चिमी देशों ने दबाव बनाया, लेकिन हम भारत को…’, US के प्रतिबंधों पर पुतिन के करीबी का बयान सुन हिल जाएंगे ट्रंप!



रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अगले महीने भारत का दौरा कर सकते हैं. उससे पहले रूस ने भारत के सामने एक महत्वपूर्ण सैन्य प्रस्ताव रखा है जिससे भारतीय एयर डिफेंस पावर और भी मजबूत हो जाएगी. मॉस्को ने पांचवीं पीढ़ी के Su-57 स्टील्थ लड़ाकू विमान की तकनीक भी भारत को देने की पेशकश की है. भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलिपोव ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर बयान दिया है.

रूस भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है

डेनिस अलिपोव ने कहा कि पश्चिमी देशों की सारी रुकावटों के बावजूद रूस भारत को तेल का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है. उन्होंने कहा कि मॉस्को दिल्ली को एनर्जी संसाधनों की खरीद में भी अच्छी डील देते रहने के लिए तैयार है. पश्चिम देश रूस से एनर्जी और तेल नहीं खरीदने को लेकर लगातार भारत पर दबाव बना रहे हैं, जबकि भारत ने दो टूक कहा है कि वह अपने नागरिकों की आपूर्ति को ध्यान में रखते हुए तेल खरीदना जारी रखेगा.

अमेरिकी प्रतिबंध पर क्या बोले रूसी राजदूत?

रूसी न्यूज एजेंसी TASS की रिपोर्ट के मुताबिक डेनिस अलिपोव ने कहा, “पिछले कुछ सालों में रूस और भारत के बीच सहयोग कई क्षेत्रों में काफी बढ़ा है, जिसका कुछ हद तक श्रेय पश्चिमी प्रतिबंधों को दरकिनार करने को जाता है.” अमेरिका ने रूस की बडी तेल कंपनी रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगा दिया है. रूसी राजदूत का मानना है कि अमेरिका के इस कदम से तेल सप्लाई को प्रभावित हो सकता है. उन्होंने कहा कि रूस भारत का प्रमुख तेल सप्लायर्स बना रहेगा.

पश्चिमी देशों के दबाव पर रूसी राजदूत का रिएक्शन

उन्होंने भारत-रूस संबंधों पर पश्चिमी देशों के दबाव को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, “भारत-रूस संबंधों को कमजोर करने के लिए पश्चिमी देशों के मु्द्दों को थोपने की कोशिशों को भारत ने मजबूती से मुकाबला किया है. भारत की दोस्ती की तारीफ करते हुए डेनिस अलिपोव ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को दरकिनार लगाए गए अवैध और एकतरफा प्रतिबंध को भारत मान्यता नहीं देता है.

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