पाकिस्तान पर हमला करेगा इजरायल? आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ की उड़ी नींद! PAK कमेंटेटर का बड़ा दावा


ईरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ जारी देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का डर पाकिस्तान को भी सताने लगा है. पाकिस्तान को ऐसा लगता है कि ईरान पर अगर बाहरी हमला होता है तो उसके छींटों से इस्लामाबाद भी अछूता नहीं रहेगा. इजरायल और अमेरिका लगातार ईरान को हमले की धमकी दे रहा है.

‘इजरायल का अगला निशाना हो सकता है पाकिस्तान’

पाकिस्तानी पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक नजम सेठी ने दुनिया न्यूज को बताया कि पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से भारत केंद्रित है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का परमाणु हथियार इस्लामिक बम नहीं हैं और न ही इसका लक्ष्य अमेरिका या इजरायल है. हालांकि ईरान के मौजूदा राजनीतिक हालात पर उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय दवाब का सामना करना पड़ेगा क्योंकि इजरायल चुप नहीं बैठेगा. उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे उम्मीद नहीं है कि अमेरिका या इजरायल ईरान में पूरी तरह सफल होंगे या नहीं, लेकिन अगर वे सफल हो जाते हैं तो इजरायल का अगला निशाना पाकिस्तान हो सकता है.’

पाकिस्तान में नेतन्याहू का खौफ

नजम सेठी के अनुसार, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वे नहीं चाहते कि पाकिस्तान या किसी भी इस्लामी देश के पास परमाणु हथियार हों. उन्होंने पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की भी पोल खोल दी. ऑपरेशन सिंदूर में भारत के हाथों पड़ी मार के बाद मुनीर और शहबाज शरीफ अपनी जनता को झूठ परोसने में लग गए थे. नजम सेठी ने सच्चाई को स्वीकार किया कि पाकिस्तान पारंपरिक युद्ध में भारत का मुकाबला नहीं कर सकता है.

परमाणु हथियार को लेकर PAK कमेंटेटर का बयान

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी पहले इस्तेमाल न करने की परमाणु नीति को छोड़ सकता है क्योंकि वह पारंपरिक तरीकों से भारत को रोक नहीं सकता. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अभी तक भारत के साथ महत्वपूर्ण परमाणु समझौते ‘नो फर्स्ट यूज़’ (एनएफयू) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. नजम सेठी के अनुसार जब तक पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार है तब तक उसे अंतरराष्ट्रीय दवाब का सामना करना पड़ेगा क्योंकि वैश्विक स्तर पर यह आशंका बनी हुई है कि हम अन्य खाड़ी देशों के साथ परमाणु टेक्नोलॉजी शेयर कर सकते हैं.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शन में करीब 2000 लोग मारे गए हैं. ईरान में अधिकारियों ने मंगलवार (13 जनवरी 2026) को कुछ प्रतिबंधों में ढील दी, जिससे वहां के निवासियों को कई दिनों में पहली बार मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल करने की अनुमति मिली.



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