पोलावरम विवाद: सुप्रीम कोर्ट में तेलंगाना सरकार की पीछे हटने की रणनीति, अब सिविल सूट से छिड़ेगी जंग!


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तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच जल बंटवारे की खींचतान अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट से निकलकर एक नई कानूनी दिशा की ओर मुड़ गई है. दरअसल, मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की नेतृत्व वाली तेलंगाना सरकार ने नल्लमाला सागर प्रोजेक्ट के खिलाफ दायर रिट याचिका को वापस ले लिया. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस याचिका को ‘डिस्पोज ऑफ’ (निस्तारित) करते हुए स्पष्ट किया कि अंतरराज्यीय जल विवादों के समाधान के लिए रिट याचिका कोई ठोस आधार नहीं है.

मामले में कई राज्य शामिल, सभी की दलीलें सुनना अनिवार्य- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान तेलंगाना सरकार के रुख पर सवाल खड़े किए. सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि इस रिट याचिका से विवाद का कोई व्यावहारिक हल नहीं निकलने वाला है. कोर्ट ने सुझाव दिया कि चूंकि यह मामला कई राज्यों आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक के हितों से जुड़ा है, इसलिए इसमें सभी पक्षों की दलीलें सुनना अनिवार्य है.

CJI ने स्पष्ट रूप से कहा कि तेलंगाना को संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत ‘ओरिजिनल सिविल सूट’ (मूल दीवानी मुकदमा) दायर करना चाहिए, ताकि गोदावरी नदी के पानी के बंटवारे और नियमों के उल्लंघन पर व्यापक सुनवाई हो सके.

दो राज्यों के बीच हो चुकी कई दौर की बातचीत

उल्लेखनीय है कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच कृष्णा और गोदावरी नदियों के जल बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए कई दौर की बातचीत हो चुकी है. इसमें केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई बैठकें भी शामिल है, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है.

जल बंटवारे को लेकर क्या बोले रेवंत रेड्डी?

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने आंध्र प्रदेश के साथ जल बंटवारे को लेकर कहा कि जल बंटवारे में तेलंगाना को उसका उचिच हिस्सा मिलना चाहिए, ताकि राज्य के किसानों और आम लोगों की जरूरतें पूरी हो सकें.

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