भारत और यूरोपीयन यूनियन (EU) के बीच मंगलवार (27 जनवरी, 2026) को हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से अमेरिका को करारा झटका लगा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन धमकियों को भी करारा झटका लगा है, जिनके दम पर वह ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं. ट्रंप ने पिछले दिनों ही फ्रांस को धमकी दी थी कि वह उनकी वाइन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाएंगे. हालांकि, एफटीए के तहत भारत यूरोपीय देशों की शराब पर टैरिफ कम करने वाला है.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार फ्री ट्रेड डील के बाद भारत में यूरोपीय कारें जैसे कि बीएमडब्ल्यू, फॉक्सवेगन और मर्सिडीज पर टैक्स घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया जाएगा, जो फिलहाल 110 प्रतिशत है. वहीं, यूरोप से आने वाली शराब और वाइन पर लगने वाला टैक्स 150 प्रतिशत से कम करके 20 से 30 प्रतिशत कर दिया जाएगा, जबकि ऑलिव ऑयल पर टैक्स 40 प्रतिशत से घटाकर जीरो हो जाएगा. यानी यूरोपीय देशों को ऑलिव ऑयल के एक्सपोर्ट पर कोई टैरिफ नहीं देना होगा.
ग्रीनलैंड को लेकर इस समय अमेरिका और यूरोपीय देश आमने सामने हैं. यूरोपीय देश ग्रीनलैंड पर ट्रंप के कब्जे के प्लान का विरोध कर रहे हैं और कुछ ने तो खुलेआम उनके इस रुख की आलोचना भी की है. ग्रीनलैंड के मुद्दे पर ये देश डेनमार्क के साथ हैं, जिसके बाद ट्रंप ने दबाव बनाने के लिए आठ यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया है और धमकी दी है कि वह यह टैरिफ और बढ़ा भी सकते हैं. इस बीच फ्रेंच प्रेजीडेंट इमैनुअल मैक्रों ने पिछले हफ्ते ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का निमंत्रण ठुकरा दिया था.
मैक्रों के कदम से ट्रंप काफी नाराज हो गए और उन्होंने धमकी दी कि वह फ्रेंच वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाएंगे. उन्होंने फ्रांस की इकोनॉमी का हवाला देते हुए यह भी कहा था कि मैक्रों जल्दी ही पद से हटने वाले हैं. बोर्ड ऑफ पीस एक मंच है, जिसका मकसद गाजा में युद्ध के बाद शांति, पुननिर्माण और स्थिरता लाना है. इसकी स्थाई सदस्यता के लिए 1 बलियिन डॉलर देना होगा, जबकि अस्थाई सदस्यों का कार्यकाल तीन साल का होगा.
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