बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में तीन हिंदू उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है. ये सभी उम्मीदवार बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) के हैं. स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह चुनाव अल्पसंख्यक भागीदारी पर बढ़ते ध्यान और देश में सांप्रदायिक तनाव को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है.
बीएनपी ने 299 सीटों में से 211 सीटें जीतीं, जबकि जमात-ए-इस्लामी सिर्फ 68 सीटों पर ही सिमट गई. प्रमुख विजेताओं में बीएनपी के वरिष्ठ नेता गायेश्वर चंद्र रॉय भी शामिल हैं, जो ढाका-3 निर्वाचन क्षेत्र से विजयी हुए हैं.
गायेश्वर चंद्र रॉय
बीएनपी की स्थायी समिति के सदस्य और पूर्व राज्य मंत्री रॉय ने 99,163 वोट हासिल किए और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार मोहम्मद शाहिनुर इस्लाम को हराया, जिन्हें 83,264 वोट मिले. यह निर्वाचन क्षेत्र जिंजीरा, आगानगर, तेघरिया, कोंडा और शुभाध्या सहित केरानीगंज के कुछ हिस्सों को कवर करता है. अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के सदस्यों को निशाना बनाकर किए गए उत्पीड़न और हमलों की हालिया खबरों को देखते हुए रॉय की जीत को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
निताई रॉय चौधरी
मागुरा-2 सीट से बीएनपी के उपाध्यक्ष निताई रॉय चौधरी ने आसानी से जीत दर्ज की. उन्हें 1,47,896 वोट मिले, जो जमात-ए-इस्लामी के मुस्तर्शीद बिल्लाह से अधिक थे, जिन्हें 1,17,018 वोट मिले. गायेश्वर चंद्र रॉय से जुड़े हुए चौधरी को बीएनपी के अंदर एक बेहद प्रभावशाली अल्पसंख्यक चेहरा माना जाता है. उनकी जीत अल्पसंख्यक आबादी वाले क्षेत्रों में पार्टी के मजबूत प्रदर्शन को और पुष्ट करती है.
अधिवक्ता दिपेन दीवान और साचिंग प्रू
इसके अलावा रंगामती संसदीय सीट से बीएनपी के तीसरे हिंदू विजेता बनकर उभरे हैं अधिवक्ता दिपेन दीवान, जिन्हें 31,222 वोट मिले. उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय उम्मीदवार पहल चकमा को 21,544 वोट मिले. इसके अलावा साचिंग प्रू अल्पसंख्यक समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले चौथे बीएनपी उम्मीदवार हैं जिन्होंने जीत हासिल की है. प्रू ने बंदरबन निर्वाचन क्षेत्र से 1,41,455 वोट प्राप्त किए.
कृष्ण नंदी हारे
इनके उलट जमात गठबंधन की ओर से मैदान में उतारा गया एकमात्र हिंदू उम्मीदवार चुनाव हार गया. जमात के टिकट पर खुलना-1 सीट से चुनाव लड़ रहे कृष्ण नंदी को 70,346 वोट मिलने के बावजूद बीएनपी के उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा. इस चुनाव में जमात द्वारा नामांकित कोई भी अल्पसंख्यक उम्मीदवार जीत नहीं सका.
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