‘भगवान श्री कृष्ण पहले मीडिएटर थे…’, श्री बांके बिहारी मंदिर मामले पर सुनवाई करते हुए बोला सुप्रीम कोर्ट


वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन को लेकर चले रहे विवाद पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भगवान श्रीकृष्ण का जिक्र किया और मामले को मीडिएशन के जरिए सुलझाने की सलाह दी है. सोमवार (4 अगस्त, 2025) को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भगवान कृष्ण पहले मीडिएटर थे और उसी तरह इस मुद्दे को भी मीडिएशन के जरिए सुलझाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट जिस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, उसमें उत्तर प्रदेश सरकार के उस अध्यादेश को चुनौती दी गई है जिसके अंतर्गत मंदिर की देखरेख एक ट्रस्ट को सौंपे जाने की योजना है. एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने कहा, भगवान कृष्ण पहले मीडिएटर थे… कृप्या आप भी मीडिएशन से इस मसले को सुलझाएं.कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए यूपी सरकार और बांके बिहारी ट्रस्ट को कमेटी गठित करने की सलाह दी है.

मंदिर से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने की. याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने दलील दी कि श्री बांके बिहारी मंदिर एक निजी धार्मिक संस्था है और सरकार इस अध्यादेश के जरिए मंदिर की संपत्ति और प्रबंधन पर अपरोक्ष नियंत्रण हासिल करना चाहती है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मंदिर के फंड का उपयोग जमीन खरीदने और निर्माण कार्यों में करना चाह रही है, जो कि अनुचित है.

श्याम दीवान ने कोर्ट से कहा कि सरकार हमारे धन पर कब्जा कर रही है. यह मंदिर एक निजी मंदिर है और हम सरकार की योजना पर एकतरफा आदेश को चुनौती दे रहे हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ दीवानी मुकदमों में, जिनमें मंदिर पक्षकार नहीं था, सरकार ने पीठ पीछे आदेश हासिल कर लिए हैं.

कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि आप किसी धार्मिक स्थल को पूरी तरह निजी कैसे कह सकते हैं, वो भी तब जब वहां लाखों श्रद्धालु आते हैं? प्रबंधन निजी हो सकता है, लेकिन कोई देवता निजी नहीं हो सकते. जस्टिस सूर्यकांत ने यह भी कहा कि मंदिर की आय सिर्फ प्रबंधन के लिए नहीं, बल्कि मंदिर और श्रद्धालुओं के विकास के लिए भी होनी चाहिए.

यूपी सरकार की तरफ से सीनियर एडवोकेट नवीन पाहवाश पेश हुए. उन्होंने कोर्ट को बताया कि सरकार यमुना तट से मंदिर तक कॉरिडोर बनाना चाहती है जिससे श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलें और मंदिर क्षेत्र को बेहतर ढंग से संरक्षित किया जा सके. उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर के फंड का उपयोग सिर्फ मंदिर से जुड़ी गतिविधियों में ही होगा. कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मंदिर का पैसा आपकी जेब में क्यों जाए? सरकार इसका उपयोग मंदिर विकास के लिए क्यों नहीं कर सकती?

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को संतुलन के साथ हल करने के संकेत देते हुए सुझाव दिया कि वह हाईकोर्ट के किसी रिटायर्ड जज या वरिष्ठ जिला न्यायाधीश को एक न्यूट्रल कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त कर सकती है, जो मंदिर के फंड और खर्च पर निगरानी रखेगा. कोर्ट ने गोस्वामी समुदाय से पूछा कि क्या वे मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि का कुछ हिस्सा श्रद्धालुओं की सुविधाओं और सार्वजनिक विकास पर खर्च कर सकते हैं. इस पर श्याम दीवान ने सहमति जताते हुए कहा कि हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम कोई न्यूट्रल अंपायर रखेंगे जो फंड मैनेजमेंट पर निगरानी रखेंगे.

श्याम दीवान ने यह भी बताया कि मंदिर का प्रबंधन ढाई सौ से अधिक गोस्वामी कर रहे हैं और वे वर्तमान व्यवस्था को बनाए रखना चाहते हैं. उन्होंने हाईकोर्ट के एक पुराने आदेश पर आपत्ति जताई, जिसमें दो पक्षों के निजी विवाद पर फैसला देते हुए बांके बिहारी मंदिर से जुड़ा आदेश पारित कर दिया गया था.



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