भारतीय सेना को 114 राफेल, 400 SCALP और Meteor मिसाइलों की मंजूरी, चीन-पाक गठजोड़ हो जाएगा धुंआ


भारत अपनी हवाई ताकत को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है. रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही अमेरिका से 6 P-8I समुद्री निगरानी विमान खरीदने का रास्ता भी साफ हो गया है. यह फैसला फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन की भारत यात्रा से ठीक पहले लिया गया है, जिससे दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.

114 राफेल जेट्स की डील को हरी झंडी
रक्षा खरीद परिषद की बैठक में फ्रांस की कंपनी दासो एविएशन से 114 राफेल जेट खरीदने को मंजूरी दी गई. इनमें से 18 विमान तैयार हालत में सीधे फ्रांस से आएंगे, जबकि 96 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा. इससे ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा और रक्षा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.

स्कैल्प मिसाइल की बड़ी खरीद
वायुसेना फ्रांस से करीब 400 SCALP क्रूज मिसाइल भी खरीदेगी. यह मिसाइल करीब 300 किलोमीटर की दूरी तक जमीन पर सटीक हमला करने में सक्षम है. बताया जा रहा है कि इसी मिसाइल का इस्तेमाल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया गया था, जिसमें आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था.

अमेरिका से 6 P-8I विमान
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए 6 लॉन्ग रेंज मेरीटाइम सर्विलांस एयरक्राफ्ट P-8I खरीदने की मंजूरी भी दी है. इनकी कीमत करीब 3 बिलियन डॉलर यानी लगभग 27 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है. भारतीय नौसेना पहले से 12 P-8I विमानों का संचालन कर रही है. ये अतिरिक्त विमान समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियानों में मदद करेंगे. भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद यह पहला बड़ा रक्षा समझौता माना जा रहा है.

क्यों जरूरी थी यह डील?
भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल 29 स्क्वाड्रन हैं, जबकि जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है. कई पुराने विमान सेवा से बाहर हो रहे हैं, जिससे नए और आधुनिक लड़ाकू विमानों की जरूरत बढ़ गई थी. राफेल की यह खरीद वायुसेना की इस कमी को दूर करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है.

राफेल की खासियत
राफेल 4.5-जनरेशन का आधुनिक लड़ाकू विमान है. इसकी मुख्य खूबियां हैं:

  • आधुनिक AESA रडार सिस्टम
  • लंबी दूरी की Meteor मिसाइल
  • SCALP स्टील्थ क्रूज मिसाइल
  • उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम     

इन तकनीकों की मदद से राफेल हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के मिशन को प्रभावी ढंग से अंजाम दे सकता है. चीन और पाकिस्तान की सैन्य गतिविधियों को देखते हुए भारत अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत कर रहा है. राफेल जैसे आधुनिक और भरोसेमंद विमान तेज प्रतिक्रिया देने में सक्षम हैं.



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